Friday, September 16, 2011
राष्ट्रमंडल घोटाले की जांच की निगरानी से इंकार
, नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रमंडल खेल घोटाले की चल रही सीबीआइ जांच की निगरानी की मांग खारिज कर दी है। शुक्रवार को कोर्ट ने जांच पर निगरानी की मांग करने वाले गैरसरकारी संगठन की याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्रीय जरांच ब्यूरो की जांच सही दिशा में जा रही है। ऐसे में अदालत जांच में कोई हस्तक्षेप नहीं करना चाहती। न्यायमूर्ति आरएम लोधा और न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा की पीठ ने याचिका पर विचार से इंकार करते हुए कहा कि मामले की जांच सीबीआइ कर रही है और हम उसमें दखल नहीं देना चाहते। हालांकि कोर्ट ने कहा कि अगर बाद में याचिकाकर्ता को जांच में कोई कमी या खामी नजर आती है, तो वह फिर कोर्ट आ सकता है। इससे पहले याचिकाकर्ता की ओर से बहस करते हुए वकील अतुलेश कुमार ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेल घोटाले में सीबीआइ ठीक से जांच नहीं कर रही है। वह कुछ चुने हुए लोगों के खिलाफ ही जांच कर रही है। प्रभावी राजनेताओं, नौकरशाहों और लाभ पाने वाले बड़े व्यवसायी के खिलाफ जांच नहीं की जा रही है। याचिका में सीएजी रिपोर्ट और शंुगलू रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, जिसमें इनके शामिल होने की बात कही गई है। उदाहरण के तौर पर दिल्ली की स्ट्रीट लाइट अपग्रेड करने का मामला ही देखा जाए। इसमें 31 करोड़ से ज्यादा के अतिरिक्त खर्च पर रोक लगाई जा सकती थी। इस मामले में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा थीं, लेकिन सीबीआइ ने इस बारे में कोई जांच नहीं की। इन रिपोर्टो में कहा गया है कि दिल्ली सरकार, अन्य मंत्रालयों और प्रमुख सरकारी संगठनों के अन्य अधिकारियों ने लोकसेवकों के तौर पर प्रथम दृष्टया अपने पद का दुरुपयोग किया और लाभ पाने के लिए साठगांठ की। इससे पूर्व शीला दीक्षित ने इससे घोटाले में अपने और दिल्ली सरकार के अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों का खंडन किया है
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