Wednesday, September 14, 2011

आडवाणी की यात्रा सियासी हथकंडा : अन्ना हजारे

भ्रष्टाचार के खिलाफ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की प्रस्तावित यात्रा से गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे खुश नहीं हैं। उन्होंने आडवाणी की इस यात्रा को महज एक दिखावा और सियासी हथकंडा करार दिया है। अन्ना का कहना है कि वह तब तक भाजपा का समर्थन नहीं करेंगे जब तक कि वह संसद में जन लोकपाल विधेयक का समर्थन नहीं करती है। साथ ही उन्होंने यह भी शर्त रखी कि अगर भाजपा शासित राज्य सरकारें अपने यहां लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए कानून बनाएं तभी हमारा समर्थन संभव है। अन्ना हजारे अपने गांव पहुंचे पत्रकारों से मंगलवार को बातचीत कर रहे थे। अन्ना ने कहा कि अगर आडवाणी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वाकई गंभीर हैं तो यात्रा करने की बजाय उन्हें भाजपा शासित सभी राज्य सरकारों से लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए कानून बनाने को कहना चाहिए। अगर आडवाणी ऐसा नहीं करते हैं तो उनकी प्रस्तावित यात्रा दिखावा के सिवा और कुछ नहीं है। गांधीवादी कार्यकर्ता के मुताबिक, अगर भाजपा कहती है कि वह अन्ना का समर्थन करती है तो उसे उन राज्यों में लोकायुक्त विधेयक लाना चाहिए, जहां उसकी सरकार है। अन्ना ने कहा कि पहले भाजपा शासित राज्यों में लोकायुक्त विधेयक लाएं, फिर हमसे समर्थन मांगे। सामाजिक कार्यकर्ता के अनुसार, टीम अन्ना का समर्थन हासिल करने के लिए भाजपा को संसद में जन लोकपाल विधेयक का समर्थन करना होगा और अपनी पार्टी द्वारा शासित राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए कानून बनाना होगा। बगैर इसके हम समर्थन करने वाले नहीं हैं। पत्रकारों से बातचीत में अन्ना हजारे वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, गृह मंत्री पी चिदंबरम और मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल पर खूब बरसे। तीनों मंत्रियों के बारे में पूछे गए सवाल पर उनका कहना था कि लोकपाल विधेयक तैयार करने के लिए गठित संयुक्त समिति की बैठकों और अन्य मौकों पर तीनों मंत्री प्रधानमंत्री की तरह बर्ताव कर रहे थे। रामदेव जैसा व्यवहार करना चाहती थी सरकार उन्होंने 16 अगस्त को दिल्ली में अपनी गिरफ्तारी के लिए चिदंबरम को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि सरकार के उनके साथ रामदेव जैसा व्यवहार करना चाहती थी। लेकिन असफल रही। अन्ना ने प्रधानमंत्री को एक अच्छा लेकिन निष्प्रभावी व्यक्ति करार दिया। गैर भाजपा-गैर कांग्रेसी को समर्थन उन्होंने कहा कि वह ईमानदार लोगों वाले गैर भाजपाई और गैर कांग्रेसी दलों के मोर्चे का समर्थन करेंगे, लेकिन उनका नेतृत्व नहीं करेंगे। अन्ना का कहना था कि सभी पार्टियों के अच्छे लोग अगर एक साथ आ सकते हैं तो वह देश की जनता से उनका समर्थन करने के लिए कहेंगे

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