Tuesday, September 13, 2011
आयकर ट्रिब्यूनल ने घूस को चंदा माना
देश की राजनीति को हिला देने वाले डेढ़ दशक पुराने झामुमो सांसद रिश्वत कांड का जिन्न फिर बोतल से बाहर आ गया है। आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल (न्यायाधिकरण) ने 1993 में पीवी नरसिंहराव की सरकार को बचाने के लिए झामुमो के चार सांसदों शिबू सोरेन, सूरज मंडल, साइमन मरांडी और शैलेंद्र महतो को कांग्रेस की ओर से मिली रिश्वत को चंदा माना है। झामुमो नेता इस धनराशि को कांग्रेस की ओर से दिया गया चंदा बताकर टैक्स या पेनाल्टी देने को तैयार नहीं थे। आयकर विभाग के दस्तावेज के मुताबिक, 1997 में संपत्ति जांच के दौरान मूल्यांकनकर्ता अधिकारी ने झामुमो के चार सांसदों शिबू सोरेन, सूरज मंडल, सिमोन मरांडी और शैलेंद्र महतो के खातों की पड़ताल की। इसमें सामने आया कि पीएनबी की दिल्ली के नारोजी नगर स्थित उनके खातों में बंगलूर के केनरा बैंक के जरिए पैसा जमा कराया गया। मूल्यांकनकर्ता ने इस धनराशि पर टैक्स और पेनाल्टी की रकम तय कर दी। इसी आधार पर आयकर के अपीलीय आयुक्त ने चारों को भुगतान का आदेश जारी कर दिया। इसके खिलाफ चारों नेताओं ने आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल की दिल्ली शाखा से संपर्क साधा। न्यायाधिकरण के न्यायिक सदस्य आरपी तोलानी और लेखा सदस्य एके गारोडिया ने झामुमो नेताओं का पक्ष सुनने के बाद 37 पृष्ठों के अपने आदेश में कहा, यह कांग्रेस की ओर से झामुमो नेताओं को मिला चंदा है और इस पर कोई टैक्स या पेनाल्टी नहीं लगेगी। पूर्व सांसदों ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामले की सुनवाई के दौरान स्वीकारा कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस की नरसिंह राव सरकार के पक्ष में मतदान के लिए कांग्रेस ने उन्हें पैसा दिया। यह अलग बात है कि सर्वोच्च न्यायालय में विशेषाधिकार कानून के जरिए बचे सांसद तकनीकी आधार पर आयकर विभाग के चंगुल से भी बच निकले
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