Monday, September 19, 2011

लोकपाल के दायरे में आए कारपोरेट सेक्टर : सीवीसी

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) का मानना है कि कारपोरेट सेक्टर को भी प्रस्तावित लोकपाल कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। आयोग ने उच्च पदों पर आसीन नौकरशाहों और राजनेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप से लोकपाल के माध्यम से निपटने का समर्थन किया है। आयोग ने कहा है कि लोकपाल काकार्यक्षेत्र स्पष्ट होना चाहिए ताकि सीवीसी से उसका टकराव न हो। केंद्रीय सतर्कता आयुक्त प्रदीप कुमार ने कहा कि ब्रिटेन की तरह रिश्वत देने वाले को भी दंडित करने का प्रावधान शामिल किया जा सकता है। हम कारपोरेट सेक्टर को भी लोकपाल के दायरे में लाए जाने के खिलाफ नहीं हैं। वर्तमान में सीवीसी के पास निजी कंपनियों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की शक्तियां नहीं हैं। आयोग सरकारी कर्मचारियों और गैरसरकारी व्यक्तियों द्वारा आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार के मामलों को सीबीआइ के पास भेजता है। प्रदीप कुमार ने कहा, लोकपाल राजनेताओं से संबंधित भ्रष्टाचार के मामलों की भी जांच कर सकता है। अगर वे भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कानून के तहत कदम उठाने जाने चाहिए। उल्लेखनीय है कि सीवीसी देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ शीर्ष सरकारी संगठन है। जुलाई में सीवीसी का पद संभालने वाले कुमार ने आगाह किया कि लोकपाल के अधिकारों की प्रक्रिया पेचीदा नहीं बनाई जानी चाहिए। इससे भ्रष्टाचार को दूर करने में विलंब होगा। उन्होंने कहा, सभी नौकरशाह विभागीय दंड नियमावलियों के अधीन आते हैं। कुछ मामलों में सीवीसी सीधे जुर्माना लगा सकता हैं, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उसे अनुमति लेनी पड़ती है। लोकपाल इन बिंदुओं पर ध्यान देकर प्रक्रिया को आसान कर सकता है। हाल में लोकपाल पर पुनर्गठित संसदीय समिति 23-24 सितंबर की बैठक में सीवीसी की भी राय ले सकती है

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