Wednesday, September 14, 2011
निघासन कांड की होगी सीबीआइ जांच
लखनऊ सुप्रीम कोर्ट द्वारा बांदा जिले के चर्चित शीलू दुष्कर्म कांड की जांच सीबीआइ से कराए जाने के आदेश के एक दिन बाद मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने लखीमपुर जिले के निघासन थाने में कथित दुष्कर्म के बाद नाबालिग लड़की सोनम की हत्या मामले में भी सीबीआइ जांच की सिफारिश कर दी है। राज्य सरकार ने बांदा दुष्कर्म कांड की सीबीआइ से जांच कराने के लिए भी पत्र प्रेषित कर दिया है। सरकारी प्रवक्ता का कहना है कि बांदा कांड की सुनवाई के दौरान सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार ने कहा था कि उसे सीबाआइ जांच कराए जाने पर कोई एतराज नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस कथन का संज्ञान लिया था, इसी वजह से उसने अपनी संस्तुति भी केंद्र को भेज दी है। प्रवक्ता ने कहा कि सोनम हत्याकांड की जांच 12 जून को ही सीबीसीआइडी को सौंप दी गई थी। जांच भी सही दिशा में चल रही है लेकिन कुछ लोग बार-बार सोनम के परिवारीजन को सीबीआइ जांच के लिए उकसा कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम कर रहे थे। लखीमपुर खीरी जिले के निघासन थाना परिसर में 10 जून को सोनम का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। उसकी मां तरन्नुम की शिकायत पर हत्या और बलात्कार का मामला दर्ज किया गया और तीन डॉक्टरों के पैनल से शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पहले पोस्टमार्टम में गड़बड़ी की आशंका व्यक्त किए जाने के बाद सोनम के शव का 13 जून को पांच डॉक्टरों के पैनल से दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें उसकी मौत गला घोंटने से हुई बताई गई, लेकिन बलात्कार के आरोप की पुष्टि नहीं हुई। सूत्रों का कहना है कि सोनम का शव ले जाते समय ढकेरवा चौराहे पर स्थिति नहर में सोनम का शव नहलाया गया था, ताकि साक्ष्य मिटाये जा सकें। इस मामले में सीबीसीआइडी जांच के आधार पर 3 जुलाई को क्षेत्राधिकारी के गनर अतीक अहमद तथा अपराध में शामिल रहे दो अन्य सिपाहियों शिवकुमार सिंह और उमा शंकर सिंह को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया और इन तीनों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र भी दाखिल हो चुका है। हालांकि सोनम की मां लगातार इस राजफाश का विरोध करती रही और उसने आरोप लगाया कि मामले की लीपापोती की गयी है। इस मामले में लखीमपुर खीरी के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक भी निलंबित
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment