Monday, September 19, 2011

भ्रष्टाचार रोकने के तरीकों के बारे में जानेगी स्थायी समिति

लोकपाल विधेयक पर गौर कर रही संसद की स्थायी समिति के समक्ष इस सप्ताह मुश्किल काम होगा। संभावना है कि समिति केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीवीसी) और सीबीआइ सहित विभिन्न संगठनों से भ्रष्टाचार रोकने के तरीकों के बारे में विचार जानेगी। विधि और न्याय तथा कार्मिक और जन शिकायत मामलों की स्थायी समिति का 3 दिन पूर्व पुनर्गठन होने के बाद कांगे्रस सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी की अध्यक्षता में 23 और 24 सितंबर को इसकी बैठक होने वाली है। संसद के हालिया मानसून सत्र में इसी समिति को लोकपाल विधेयक भेजा गया और तीन महीने के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया। समिति से मजबूत लोकपाल विधेयक बनाने के तरीके सुझाने को कहा गया है ताकि अन्ना हजारे के नेतृत्व वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और सरकार के बीच मतभेद दूर किए जा सकें। सरकार ने जहां लोकपाल विधेयक संसद में पेश किया, वहीं हजारे पक्ष ने जन लोकपाल विधेयक का खाका तैयार किया जिसमें ऐसे कुछ प्रावधान हैं जो सरकार को मंजूर नहीं हैं। समिति की इन दो बैठकों में सीवीसी और सीबीआइ अधिकारियों के साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय, जाने माने वकील हरीश साल्वे और दलित नेता उदित राज को अपने विचार बताने के लिए बुलाया गया है। इस 31 सदस्यीय समिति में सिंघवी, भाजपा के राम जेठमलानी, बसपा के विजय बहादुर सिंह और कांग्रेस के मनीष तिवारी तथा शांताराम नाईक सहित कई सदस्य ऐसे हैं जो विधि विशेषज्ञ हैं। समिति में लालू प्रसाद, राम विलास पासवान और अमर सिंह भी हैं। समिति हजारे पक्ष के विचारों को पहले ही सुन चुकी है। समिति ने सभी से अनुरोध किया है कि उसे काम करने का उचित मौका दिया जाए। सिंघवी ने कहा, संभव है कि इससे सभी आलोचकों को आश्चर्य हो। प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समिति न सिर्फ सरकार द्वारा पेश विधेयक पर, बल्कि जन लोकपाल विधेयक और अरुणा रॉय के विधेयक सहित विभिन्न संस्करणों पर भी गौर कर सकेगी

No comments:

Post a Comment