Wednesday, September 14, 2011
किरकिरी से बचने को कैग से जांच को तैयार
नई दिल्ली समय की मांग को देखते हुए दिल्ली सरकार बिजली कंपनियों के खाते को कैग (नियंत्रक और महालेखा परीक्षक) से जांच कराने को तैयार हो गई है। इसके लिए डीईआरसी को सलाह दी गई है। हालांकि, सरकार की तरफ से यह फैसला तब आया है जब कैग द्वारा जांच कराने का मुद्दा उच्च न्यायालय के पास विचाराधीन है और इसकी अगली सुनवाई 16 नवम्बर 2011 को तय है। बताया जाता है कि सरकार ने यह कदम आने वाले समय में मिलने वाली चेतावनी के मद्देनजर उठाया है। दिल्ली की जनता कैग द्वारा बिजली कंपनियों के खातों की जांच की मांग सरकार से कई बार कर चुकी है। दिल्ली विस के मानसून सत्र के दौरान भी सत्तापक्ष के कुछ विधायकों की तरफ से सरकार पर बिजली कंपनियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। दिल्ली सरकार के अनुसार सरकार ने डीईआरसी के हाल के आदेश पर गौर किया है जिसमें कुछ वित्तीय वषरें के तीन वितरण कम्पनियों के ऑडिट कैग से कराये जाने के फैसले को दोहराया गया था। दिल्ली सरकार डीईआरसी द्वारा जिक्र किए गए वितरण कम्पनियों के कैग से ऑडिट कराने पर सहमत हो गई है। डीईआरसी ने दिल्ली सरकार को बताया था कि कि कम से कम तीन साल 2007-08, 2008-09 और 2009-10 के वित्तीय वषरें के बीआरपीएल, बीवाईपीएल और एनडीपीएल के खातों के ऑडिट कैग से कराया जाएं। वितरण कंपनियों द्वारा दरें तय किए जाने की याचिका पर की गई जन सुनवाई के दौरान कई पक्षों ने कहा था कि तीनों वितरण कम्पनियों के खातों में बहुत अधिक विसंगतियां हैं। जिस पर दिल्ली सरकार ने डीइआरसी की सलाह का स्वागत किया है। गौरतलब है कि बिजली कंपनियों की मनमानी और सरकार द्वारा बिजली कंपनियों पर अंकुश न लगा पाने को लेकर बिजली उपभोक्ता काफी नाराज है। पिछले वर्ष डीइआरसी के तत्कालीन चेयरमैन ब्रजेंद्र सिंह ने बिजली कंपनियों द्वारा दी गई रिपोर्ट देखने के बाद बिजली की दरें 20 फीसदी कम करने की बात कही थी। लेकिन यह हो नहीं पाया था। सरकार पर आरोप लगे थे कि उसने बिजली कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए डीईआरसी में दखलअंदाजी की। बाद में इस वर्ष कुछ औपचारिकताएं पूरी करने के बाद करीब बिजली के मूल्य में 22 फीसदी वृद्धि कर दी गई। हालांकि, वर्तमान में डीईआरसी के चेयरमैन सुधाकर हैं। दिल्ली सरकार के विद्युत विभाग ने डीईआरसी को यह भी सूचित किया था कि भारत सरकार द्वारा जारी दर नीति की धारा 8.2.1 के अनुसार डीईआरसी को वितरण कम्पनियों द्वारा प्रस्तुत वित्तीय और तकनीकी डेटा की स्वतंत्र जांच की प्रणाली स्थापित करनी चाहिए
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