Saturday, September 10, 2011
कैग के निशाने पर वायुसेना के अताशे
नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने विदेशी विक्रेताओं से उपकरणों की खरीद में देरी के लिए भारतीय दूतावासों में वायुसेना के अताशे की आलोचना की है। कैग ने खरीद प्रक्रिया को दुरुस्त करने की जरूरत पर जोर दिया है। कैग ने संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारतीय दूतावासों के जरिए होने वाली अहम और तत्काल जरूरत वाले उपकरणों की खरीद में देरी हुई है। वायुसेना प्रकोष्ठ ने संभावित विक्रेताओं से कॉमर्शियल ऑर्डर मंगवाने के लिए उचित प्रक्रिया नहीं अपनाई। प्रकोष्ठ ने हर स्तर पर काफी ज्यादा देरी की। इस देरी के कारणों को स्पष्ट भी नहीं किया जा सकता। कैग की रिपोर्ट इस तरह की खरीद के 55 मामलों की छानबीन पर आधारित है। इन मामलों को लंदन, मास्को, पेरिस और कीव स्थित भारतीय दूतावासों के वायुसेना प्रकोष्ठ ने वर्ष 2007 से जून 2010 के बीच अंतिम रूप दिया था। नियंत्रक और महालेखा परीक्षक ने कहा कि वायुसेना मुख्यालय की निर्णय प्रक्रिया भी काफी धीमी रही। इसके चलते कई मामलों में अनुबंधों को अंतिम रूप देने में देरी हुआ। अनुबंध देने में काफी लंबा वक्त लगा, जिससे खरीद की जरूरत का महत्व कम हुआ। विक्रेताओं द्वारा तय समय पर उपकरणों की आपूर्ति नहीं करने के बावजूद उन पर कोई नकद क्षतिपूर्ति नहीं लगाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक जेट ट्रेनर के लिए उपकरण की मदद का कार्यक्रम खराब रहा। वहीं, वायुसेना ने अब तक विमान निर्माता (बीएई सिस्टम्स) के साथ दीर्घकालिक उत्पाद समर्थन कार्यक्रम तैयार नहीं किया। उपकरणों की सुपुर्दगी से पहले लंबा वक्त लगने के उदाहरण देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि लंदन में रक्षा खरीद नियम पुस्तिका में निर्धारित 180 दिन के वक्त के बजाय 15 महीने से अधिक समय लग गया। कैग ने ऑर्डर की कीमत निर्धारण प्रणाली में खामियों की आलोचना करते हुए कहा कि कीमत या तो आकलन के आधार पर तय की गई या पिछली बार हुई खरीद के आधार पर। इसमें खामी नजर आती है। कैग ने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने भी इस तथ्य को स्वीकार किया है। इससे भारतीय दूतावासों के जरिए अहम और तत्काल जरूरत वाले उपकरणों की खरीद प्रक्रिया को दुरुस्त करने की जरूरत महसूस हो रही है
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