Wednesday, September 14, 2011
उड़ीसा में मंत्रियों-विधायकों पर एफआइआर
: उड़ीसा सरकार ने राज्यसभा चुनाव में वोटों की कथित खरीद-फरोख्त के मामले में कुछ मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर ली है। पुलिस के मुताबिक एफआइआर में किसी का नाम न लेते हुए कुछ मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस सूत्रों ने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार द्वारा मुहैया कराए गए सबूतों की पड़ताल कर आरोपी मंत्रियों और विधायकों की पहचान की जाएगी और मुकदमा चलाया जाएगा। गृह विभाग के उपसचिव एसएन प्रधान की शिकायत के आधार पर राजधानी के कैपिटल पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया। गृह सचिव यूएन बेहरा ने संवाददाताओं को बताया कि चुनाव आयोग के निर्देशानुसार मामले की तहकीकात की जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। 17 जून 2010 को हुए राज्यसभा चुनाव में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल द्वारा तीन सीटें जीत लेने के बाद खरीद फरोख्त की हाय तौबा मची थी। हालांकि सत्तारूढ़ दल के पास तीनों सीटें जीतने लायक संख्या नहीं थी। मामले ने तूल तब पकड़ा जब एक स्थानीय टीवी चैनल ने एक आडियो टेप जारी किया। इसमें कथित तौर पर एक मंत्री एक बिचौलिये से राज्यसभा चुनाव के बारे में बात कर रहा था। बिचौलिया एक कांग्रेस विधायक की ओर से मंत्री से सौदेबाजी कर रहा था। यह कांग्रेसी विधायक राज्यसभा वोटिंग के दौरान मतदान से गैरहाजिर रहा था। चुनाव में बीजेडी के दो प्रत्याशी तो पर्याप्त संख्या बल के कारण जीत गए। मगर तीसरे उम्मीदवार को भी जीत मिली क्योंकि कांग्रेस के दो और भाजपा का एक विधायक मतदान के दौरान गैरहाजिर रहा। तीनों विधायकों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया। भाजपा और कांग्रेस ने व्हिप का उल्लंघन करने पर आरोपी विधायकों को निलंबित कर दिया था। वोटों की खरीद फरोख्त का मामला उछलने पर चुनाव आयोग ने बेहद गंभीर रुख अपनाया था। उसने राज्य सरकार से इस मामले की गहनता से जांच कराने को कहा था
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