अहमदाबाद कांग्रेस आलाकमान की उम्मीदों के अनुरूप गुजरात के दिग्गज नेता शंकर सिंह वाघेला ने अंतत: राज्य की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदेश कांग्रेस का चुनाव प्रभारी बनाए जाने के बाद रविवार को उन्होंने एक तरफ जहां मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए उनकी सरकार को भ्रस्ट, त्रस्त और ग्रस्त करार दिया वहीं, भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी समेत भाजपा पर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर दोहरा मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रधानमंत्री की तरह मुख्यमंत्री मोदी से भी अपनी संपत्ति सार्वजनिक करने की मांग की। यहां आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में वाघेला ने भाजपा और उसके शीर्ष नेता आडवाणी पर हमला बोलते हुए कहा कि वह एक तरफ भ्रष्टाचार के खिलाफ समाजसेवी अन्ना हजारे के आंदोलन के समर्थन के ढिंढोरे पीट रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर मोदी सरकार के भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए राज्यपाल द्वारा लोकायुक्त नियुक्त करने पर राष्ट्रपति के यहां दस्तक देकर उसका विरोध कर रहे हैं। पे्रस कांफ्रेंस के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अर्जुन मोढवाडिया तथा विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता शक्तिसिंह गोहिल उनके साथ थे। वाघेला ने मोदी पर निशाना साधते हुए सरकार के वाईब्रेंट गुजरात नारे को वाईब्रेंट भ्रष्टाचार बताया। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार पारदर्शी और ईमानदार है तो लोकायुक्त से डर क्यों रही है। उन्होंने कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री अपनी संपत्ति को सार्वजनिक कर सकते हैं तो मुख्यमंत्री मोदी क्यों अपनी संपत्ति की जानकारी उजागर नहीं कर रहे। वाघेला ने कांग्रेस छोड़ने की अटकलों को विराम देते हुए कहा कि राकांपा और भाजपा ने उन्हें अपने साथ आने का न्योता दिया था, लेकिन वह कांग्रेस छोड़ने वाले नहीं हैं। उन्होंने नवरात्रों से मोदी सरकार के खिलाफ रैलियों का सिलसिला शुरू करने का एलान किया। उन्होंने बताया कि इसकी शुरूआत भ्रष्टाचार के केंद्र बने कच्छ-भुज से होगी। यहां आगामी 28 सितंबर को माता ना मढ मंदिर में दर्शनों के बाद सरकार विरोधी एक रैली आयोजित की जाएगी, जबकि दूसरी रैलीअंबामाता का दर्शन के बाद 30 सितंबर को पालनपुर शहर में होगी। पालनपुर शहर में रैली निकालेंगे। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन मोढवाडिया ने कहा है कि गरीब और किसान के लिए सचिवालय के दरवाजे बंद हो गए हैं, राज्य के 80 हजार करोड़ के बजट में गरीबों के लिए कोई अनुदान नहीं है। संवैधानिक पदों पर नियुक्ति में खुद सरकार बाधक बन रही है। लोकायुक्त, सूचना आयुक्त, विधानसभा में उपाध्यक्ष आदि पदों के लिए कांग्रेस के आग्रह के बावजूद सरकार निश्ंिचत है। मुख्यमंत्री यदि स्वच्छ और पारदर्शी सरकार का दावा करते हैं तो लोकायुक्त की नियुक्ति करने से क्यों डरते हैं। नेता प्रतिपक्ष शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि मुख्यमंत्री साधारण जनता तो क्या अब खुद विधायकों तथा पत्रकारों तक से नहीं मिलते। कांग्रेस के शासन में मंत्री, मुख्यमंत्रियों से आसानी से मिला जा सकता था, लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार ने सबके लिए दरवाजे बंद कर दिए हैं।
Wednesday, September 7, 2011
वाघेला ने खोला मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा
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