Tuesday, September 27, 2011

चिदंबरम की इस्तीफे की पेशकश

प्रणव और चिदंबरम ने की सोनिया से मुलाकात

नई दिल्ली। 2जी स्पेक्ट्रम मामले में वित्त मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखे पत्र ने कांग्रेस की राजनीति में ऐसा भूचाल ला दिया दिया है जो थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस पूरे प्रकरण से बेहद आहत गृहमंत्री पी चिदंबरम ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर अपने इस्तीफे की पेशकश की। महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अमेरिका से लौटने के बाद वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भी पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। प्रणव लगभग एक घंटे तक सोनिया के साथ रहे। इससे पूर्व प्रणव ने चिदंबरम से भी बात की। बताया जा रहा है कि पूरे घटनाक्रम से जितने आहत चिदंबरम हैं, उतने ही नाराज प्रणव मुखर्जी भी हैं और इन दोनों से कहीं ज्यादा आहत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हैं। सूत्रों की मानें तो स्वदेश वापसी के बाद प्रधानमंत्री कोई बड़ा पैसला ले सकते हैं। सरकार के दोनों वरिष्ठ मंत्रियों की नाराजगी का कारण यह है कि पूरे घटनाक्रम में जिस तरह से वित्त मंत्रालय और वित्त मंत्री की भूमिका को लेकर संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है, उससे दादा की भौहें तनी हुई हैं। सूत्रों की मानें तो पार्टी अध्यक्ष से मुलाकात में प्रणव ने जहां प्रधानमंत्री से न्यूयार्क में हुई अपनी बातचीत का ब्यौरा दिया, वहीं कहा कि वित्त मंत्रालय के नोट को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।उधर गृहमंत्री पी चिदंबरम ने सोनिया से मुलाकात में साफ कहा कि जिस तरह से उनकी छवि पर सवाल उठाए जा रहे हैं उससे न केवल वह आहत हैं, बल्कि उन्होंने अपने इस्तीफे की पेशकश यह कर की कि वह नहीं चाहते हैं कि उनके कारण पार्टी को असहज स्थितियों का सामना करना पड़े। उन्होंने कहा कि इस मामले की पूरी जांच होनी चाहिए कि उनके खिलाफ राजनीतिक षड़यंत्र के लिए कौन जिम्मेदार है।

चिदंबरम की नाराजगी को इससे भी समझा जा सकता है कि कल बाढ़ का जायजा लेने के लिए उड़ीसा जाने के कार्यक्रम को उन्होंने रद्द कर दिया है। मामले में कुछ भी कहने से पूर्व वह एक बार प्रधानमंत्री से बात करना चाहते हैं। पार्टी नेतृत्व की समस्या यह है कि जितना वह मामले को शांत करने की कोशिशों में जुटा है उतना ही मामला थमने का नाम नहीं ले रहा। पार्टी विधिवेत्ताओं से यह राय भी ले रही है कि क्या वित्त मंत्रालय के नोट को न्यायालय में साक्ष्य के रूप में पेश किया जा सकता है। इससे पूर्व वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सोमवार को स्वदेश वापसी के बाद अपने मंत्रालय पहुंचकर अधिकारियों से पूरी जानकारी ली। इस पूरे मामले में जहां वित्त मंत्रालय अपने को पाक साफ मान रहा है तो वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि नोट वित्त मंत्रालय से आया है इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। कांग्रेस के रणनीतिकार मान रहे हैं कि एक सामान्य नोट के चलते पूरी सरकार का अस्तित्व दांव पर लगा हुआ है। दस जनपथ में दोनों मंत्रियों की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद अब पार्टी नेतृत्व को प्रधानमंत्री की स्वदेश वापसी का इंतजार है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री की सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद ही पार्टी अपनी रणनीति के पत्ते खोलेगी। उधर, सरकार के मंत्री 2 जी नोट को सामान्य प्रक्रिया बताकर मामले को जितना सहज बनाने की कोशिशें में जुटे हैं, पार्टी की अंतर्कलह उनके प्रयासों पर पानी फेर रही है। केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने सोमवार को फिर साफ किया कि सरकार के मंत्रियों में कोई मतभेद नहीं है और वित्त मंत्रालय द्वारा भेजा गया नोट एक सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने फिर गृहमंत्री को ईमानदार और सक्षम मंत्री बताते हुए कहा कि उनके ऊपर संदेह का कोई मतलब ही नहीं है। सरकार के साथ ही पार्टी भी पूरी तरह से चिदंबरम के पक्ष में खड़ी है। पार्टी ने आज फिर चिदंबरम का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है और उनके इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता। पार्टी जहां चिदंबरम का बचाव कर रही है तो वहीं नोट के लिए वित्त मंत्री का भी पक्ष यह कहते हुए ले रही है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया। वित्त मंत्री और गृहमंत्री दोनों की चुप्पी से रहस्य और गहराता जा रहा है। केंद्र की यूपीए सरकार के कार्यकाल में पहली बार कांग्रेस पार्टी के मंत्री ही नहीं, प्रधानमंत्री भी निशाने पर हैं। पार्टी की समस्या यह है कि ताजा विवाद में शामिल उसके दोनों ही मंत्री न केवल काफी वरिष्ठ हैं, बल्कि तेज तरार्र भी हैं। पार्टी नेतृत्व मान रहा है कि इस बार का संकट काफी गंभीर है और यदि इससे सही तरीके से नहीं निपटा गया तो सरकार और पार्टी दोनों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है। मामले की गंभीरता को समझते हुए ही सर्जरी के बाद स्वास्थ्य लाभ कर रहीं पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने स्वयं कमान संभाली। इलाज कराकर वापस लौटने के बाद आज पहली बार उन्होंने अपने दोनों मंत्रियों से लगभग डेढ़ घंटे बातचीत की। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष के बीच फोन पर बात हुई है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने विधि मंत्री सलमान खुर्शीद से भी इस मामले में बात की है। पार्टी न्यायालय के रुख को लेकर भी काफी सहमी हुई है। गौरतलब है कि न्यायालय के कड़े रुख के चलते ही पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा और दयानिधि मारन को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी थी।

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