Thursday, September 15, 2011

दिल्ली एयरपोर्ट पर ठेका व्यवस्था खत्म करो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) को करारा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने डायल को ट्राली मजदूरों को नौकरी पर रखने की कांट्रैक्ट यानी ठेका व्यवस्था समाप्त करने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने डायल को नौकरी से हटाए गए 136 ट्राली खींचने वाले ठेका मजदूरों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा भी अदा करने का निर्देश दिया है। यह महत्वपूर्ण फैसला न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी व न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की पीठ ने डायल, एयरपोर्ट अथारिटी व अन्य की ओर से दाखिल याचिकाओं का निपटारा करते हुए सुनाया है। पीठ ने कहा कि ट्राली मजदूरों में ठेका व्यवस्था समाप्त करने वाली केन्द्र सरकार की 26 जुलाई 2004 की अधिसूचना डायल पर बाध्यकारी है। कोर्ट ने कहा कि डायल को एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया (एएआइ) का सारा काम स्थानांतरित हुआ है इसमें एएआइ की जिम्मेदारियां भी डायल को स्थानांतरित मानी जाएंगी और वे उस पर बाध्यकारी होंगी। पीठ ने कहा कि कानून की परिभाषा में डायल के लिए सक्षम सरकार केन्द्र सरकार है और केन्द्र सरकार की अधिसूचना उस पर बाध्यकारी है। डायल को उस सूचना के मुताबिक कांटै्रक्ट लेबर सिस्टम समाप्त करना होगा और ट्राली ठेका मजदूरों की सेवाएं नियमित करनी होगी। लेकिन इस बीच डायल बहुत से ट्राली ठेका मजदूरों की सेवाएं समाप्त कर उनकी जगह नये ट्राली ठेका मजदूर भर्ती कर चुका है। पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में डायल से 2003 तक नौकरी करने वाले ट्राली मजदूरों की नियमित करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती है और ये व्यावहारिक भी नहीं होगा। कोर्ट ने कहा मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए यही न्यायोचित होगा कि डायल 2003 तक नौकरी करने वाले 136 ट्राली ठेका मजदूरों को पांच- पाच लाख रुपये मुआवजा दे। कोर्ट ने डायल को तीन महीने के भीतर मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया और कहा कि अगर इस अवधि के भीतर पैसे का भुगतान नहीं किया गया तो डायल को 12 फीसदी प्रतिमाह की दर से ब्याज देना होगा। अगर कर्मचारियों की मृत्यु हो गयी हो तो रकम उनके परिजनों को दी जाएगी। क्या था मामला : टीडीआइ इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड ने 1992 में 136 मजदूरों को दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय व डोमेस्टिक एयरपोर्ट पर ट्राली खींचने के लिए ठेके पर रखा। कुछ मजदूरों ने सेवा नियमित करने की मांग करते हुए लेबर कोर्ट में याचिकाएं दाखिल कीं। केन्द्र सरकार ने लेबर कोर्ट की सिफारिशें स्वीकार करते हुए 26 जुलाई 2004 को कांटै्रक्ट लेबर व्यवस्था समाप्त करने की अधिसूचना निकाली। केन्द्र सरकार ने कांट्रैक्ट लेबर (रेगुलेशन एण्ड एबोलिशन) एक्ट 1970 की धारा 10(1) के तहत ट्राली खींचने वाले मजदूरों को ठेके पर रखे जाने की व्यवस्था समाप्त कर दी। 1992 से नौकरी कर रहे ट्राली मजदूरों को 2003 में नौकरी से निकाल दिया गया, क्योंकि टीडीआइ का ठेका समाप्त हो गया था और उसकी जगह नया ठेकेदार सिंधु होल्डिंग्स आ गया था। नौकरी से निकाले गये मजदूरों ने केन्द्र सरकार की अधिसूचना के मुताबिक सेवाएं नियमित करने की मांग की। लेकिन डायल ने ऐसा करने से मना कर दिया। उसकी दलील थी कि केन्द्र सरकार की अधिसूचना उस पर बाध्यकारी नहीं है। सुप्रीमकोर्ट ने आज साफ कर दिया कि डायल पर केन्द्र सरकार की अधिसूचना बाध्यकारी है। कोर्ट के इस फैसले से 136 ट्राली खींचने वाले ठेका मजदूरों को लाभ मिल जाएगा

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