Saturday, September 17, 2011

जयललिता को एक और झटका

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता को आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक और झटका लगा है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कर्नाटक हाईकोर्ट ने मामले में आगे जांच करने के तमिलनाडु विजिलेंस विभाग के फैसले को खारिज कर दिया। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत पेशी से छूट देने से इंकार करते 20 अक्तूबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहने को कहा था। डीएमके महासचिव के. अनबाझगन ने याचिका दायर कर तमिलनाडु सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के निदेशक द्वारा मामले में आगे और जांच करने के फैसले को चुनौती दी थी। अनबाझगन की याचिका स्वीकार करते हुए 29 जुलाई को कोर्ट ने विजिलेंस के फैसले पर 4 अगस्त तक रोक लगा दी थी। साथ ही मामले में विशेष सरकारी अभियोजक और विजिलेंस शाखा चेन्नई को नोटिस जारी किया था। जस्टिस वी. जगन्नाथन ने शुक्रवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 15 जून के विजिलेंस विभाग के फैसले को खारिज कर मामले में आगे जांच करने को लेकर चल रही कवायद पर विराम लगा दिया। कोर्ट ने अंतरिम आदेश पर मुहर लगाते हुए कहा कि विजिलेंस इस मामले में आगे जांच नहीं कर सकता। न्यायाधीश जगन्नाथन ने कहा कि वक्त आ गया है कि मामले में न्याय किया जाए। अदालत ने साफ तौर पर जयललिता को निशाने पर लेते हुए कहा कि उनके सत्ता में आने के बाद आगे और जांच के फैसला संदेह पैदा करता है। इस बारे में विभिन्न विभागों के बीच हुए संवाद से साफ पता चलता है कि आगे और जांच का फैसला राज्य के मुख्य सचिव ने लिया है। राज्य के मुखिया पर चल रहे मामले में सरकार की ओर से जांच एजेंसी को दोबारा जांच करने का फैसला कई सवाल खड़े करता है। इस फैसले की मामले में आगे और जांच या दोबारा जांच करने से पहले जो किया जा चुका है, उसे बदला नहीं जा सकता। उच्च न्यायालय ने जया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के इस मामले में ट्रायल कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन करने को भी कहा है। अनबाझगन ने याचिका में आरोप लगाया था कि विजिलेंस के फैसले से प्रतीत होता है कि आरोपियों के साथ उसकी साठगांठ है। उन्होंने कहा कि बेंगलूर की विशेष कोर्ट में सुनवाई के दौरान विजिलेंस के इस फैसले का एकमात्र उद्देश्य रिकॉर्ड में लाए जा चुके सबूतों और साक्ष्यों को नष्ट करना है। याचिका में कहा गया है कि सीआरपीसी की धारा 173(8) की आड़ में आगे जांच करने का यह फैसला राजनीतिक मकसद से लिया गया है और इसका उद्देश्य मुख्यमंत्री को फायदा पहुंचाना है। सुनवाई में कोई राजनीतिक दखल न पड़े, इसे देखते हुए इस मामले की सुनवाई तमिलनाडु से बाहर की जा रही है

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