जागरण ब्यूरो अन्ना हजारे व जनलोकपाल को लेकर केंद्र सरकार के पल-पल बदलते इरादों के कारण संसद में शुक्रवार को जनलोकपाल पर चर्चा नहीं हो सकी। सरकार की शंकाओं व शर्तो को देख अन्ना ने प्रधानमंत्री को लिखित भरोसा दिलाया है कि अगर संसद में उनकी तीन मुख्य मांगों के समर्थन में प्रस्ताव पारित हो जाए तो वे अनशन खत्म कर देंगे। वहीं, सरकार की कोशिश जन लोकपाल पर सदन में चर्चा कराने की तो है, मगर चर्चा के प्रस्तावों में बंधने की नहीं। सरकार ने तय किया कि शनिवार को संसद में जन लोकपाल पर चर्चा जरूर होगी, लेकिन मत विभाजन नहीं। इस चर्चा की शुरुआत लोकसभा में प्रणब मुखर्जी के बयान से होगी। इस तरह जन लोकपाल पर चर्चा हो जाएगी। सदन की भावना भी व्यक्त हो जाएगी। साथ ही यह सरकार के लिए बाध्यकारी भी नहीं रहेगा। इस प्रस्ताव पर टीम अन्ना बहुत उत्साहित नहीं है और उसे प्रस्ताव के पारित होने का इंतजार है। शुक्रवार को सरकार ने कई बार अपना इरादा बदला। गुरुवार रात कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने भरोसा दिया था कि अगले दिन संसद में इस पर चर्चा होगी। मगर शुक्रवार सुबह संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने नियमों का हवाला दे कर इसे मुश्किल बता दिया। संसद में विपक्ष ने हंगामा किया तो सरकार चर्चा को तैयार हुई, मगर बिना वोटिंग के। इस पर विपक्ष तैयार नहीं हुआ। इस बीच वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अन्ना से दुबारा अनुरोध किया कि वे संसद की भावनाओं का सम्मान करते हुए अनशन तोड़ दें। लोकसभा की कार्यवाही के स्थगन के बाद सरकार ने एक मसौदा अन्ना को भिजवाया। इसके मुताबिक, लोस में शनिवार को कांग्रेस सांसद संदीप दीक्षित जन लोकपाल को एक प्रस्ताव के तौर पर रखेंगे, जिसमें अन्ना की तीन प्रमुख मांगों का अलग से उल्लेख किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर अन्ना काफी हद तक राजी हो रहे थे, मगर तब तक सरकार ने अपना इरादा बदल दिया। फिर तय हुआ कि अब इस मुद्दे पर चर्चा होगी, जिसकी शुरुआत वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी करेंगे। इससे पहले अन्ना ने प्रधानमंत्री को लिखित मसौदा भेजकर भरोसा भी दिया कि संसद में उनकी तीन प्रमुख मांगों के पक्ष में प्रस्ताव पारित होते ही वे अनशन खत्म कर देंगे। अन्ना की तीन मांगों में पहली है, लोकपाल बिल को संसद के इसी सत्र में पास किया जाए। इससे केंद्र में एक स्वतंत्र लोकपाल की संस्था और राज्यों में भी इसी तर्ज पर लोकायुक्त कायम हो। दूसरी मांग, सभी केंद्रीय सरकारी कर्मचारी लोकपाल के और राज्य कर्मचारी लोकायुक्त के दायरे में आएं। तीसरी शर्त है नागरिक घोषणापत्र तैयार कर जनता के सभी काम तय समय सीमा में पूरा करना और ऐसा न होने पर जुर्माने की व्यवस्था हो। प्रशांत भूषण ने कहा, अगर सरकार को अन्ना की सेहत की चिंता है तो वे अन्ना के प्रस्ताव को तुरंत संसद में पास करवाने की कोशिश शुरू करें। शुक्रवार को तो यह नहीं हो सका पर शनिवार को इसे जरूर करवाने की पहल करे।

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