Thursday, August 25, 2011

ए.राजा भी मनमोहन को बनाएंगे अपना गवाह

जेल में बंद पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा ने सीबीआइ की विशेष अदालत के समक्ष कहा है कि वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम और वर्तमान दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल को गवाह के तौर पर बुलाएंगे। राजा ने जोर देकर कहा कि इससे साबित हो सकेगा कि 2जी आवंटन में सरकारी खजाने को कोई नुकसान नहीं हुआ। घोटाले में एक और आरोपी कनीमोरी ने भी मंगलवार को यही मांग की थी। राजा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील कुमार ने सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश को बताया कि जिस समय यह साबित हो जाएगा कि राजकोष को कोई नुकसान नहीं हुआ तब स्पेक्ट्रम आवंटन में धोखाधड़ी और षड्यंत्र का पूरा मामला खत्म हो जाएगा और प्रधानमंत्री तथा दो अन्य मंत्री यह साबित करने में सक्षम होंगे। कुमार ने कहा कि राजा सीबीआइ से कुछ खास दस्तावेज हासिल करने के लिए सीआरपीसी की धारा 91 के तहत आवेदन करेंगे जो अब तक अदालत के समक्ष नहीं लाए गए हैं। बचाव पक्ष के वकील ने स्वान टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड और यूनिटेक (तमिलनाडु) वायरलेस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा क्रमश: दुबई स्थित एतिसलात और नार्वे स्थित टेलीनॉर को हिस्सेदारी बेचे जाने का मुद्दा भी उठाया और उल्लेख किया कि इस लेनदेन में कोई आपराधिक चीज नहीं है। बचाव में कहा कि लाइसेंसों की कोई बिक्री नहीं हुई और शेयरों की बिक्री 74 प्रतिशत की सीमा के भीतर थी। इसके अलावा लेनदेन के उच्चतम स्तर विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड पर मंजूरी मिली थी। किसी कारपोरेट हाउस का नाम लिए बगैर सुशील कुमार ने आरोप लगाया कि राजा को दूरसंचार क्षेत्र के बड़े खिलाडि़यों को नाराज करने की कीमत अदा करनी पड़ी है। बचाव पक्ष ने राजा के रिश्वत लेने के सीबीआइ के आरोप को खत्म करने की मांग करते कहा कि जांच एजेंसी को स्पष्ट करना चाहिए कि कोई मंत्री चेक और ऋण के रूप में किश्तों के जरिए रिश्वत क्यों लेगा। उन्होंने सीबीआइ के इस आरोप के सदंर्भ में यह बात कही कि द्रमुक संचालित कलैगनर टीवी ने घोटाले के कथित लाभार्थी शाहिद उस्मान बलवा की कंपनियों के जरिए 200 करोड़ रुपये की रिश्वत ली। राजा के वकील ने यह भी आरोप लगाया कि जहां तक यूनिटेक और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड जैसी दूसरी कंपनियों की बात है तो सीबीआइ लाइसेंस जारी करने के लिए कोई मकसद साबित करने में विफल रही है। जहां तक यूनिटेक की बात है तो ऐसा कुछ नहीं हुआ कि हमने एक-दूसरे को फायदा पहुंचाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यदि सीबीआइ के नुकसान सिद्धांत को सही भी मान लिया जाए तो सिर्फ दो कंपनियां स्वान टेलीकॉम और यूनिटेक ही इस अदालत के समक्ष क्यों हैं। कुमार ने तर्क दिया कि लूप टेलीकॉम, स्पाइस कम्युनिकेशंस, आइडिया सेल्युलर और अन्य कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।


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