नई दिल्ली अन्ना हजारे ने अपने आंदोलन से दलितों और अल्पसंख्यकों को ज्यादा संख्या में जोड़ने के लिए खास प्रयास शुरू कर दिए हैं। इस लिहाज से जहां एक ओर किरण बेदी ने जामा मस्जिद के इमाम सैयद अहमद बुखारी से मिलकर उन्हें मनाने की कोशिश की, वहीं खुद अन्ना ने भी दलितों के कल्याण के प्रति अपने समर्पण की बात कह कर उन्हें जोड़ने की विशेष कोशिश भी की। अन्ना को समर्थन देने के नाम पर दलित राजनीति बंटी हुई देखी गई है। एक ओर जहां उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने अन्ना के आंदोलन को समर्थन का एलान किया है, वहीं उनके विरोधी कुछ दलित नेताओं ने अन्ना के आंदोलन का समर्थन नहीं करने की अपील भी की है। ऐसे में दलितों को अपने साथ जोड़ने के लिए अन्ना खुद सामने आये। गिरते स्वास्थ्य के बावजूद जब मंगलवार को अन्ना बोले तो उन्होंने यह जरूर याद दिलाया कि आंदोलन ही नहीं, उनकी जिंदगी में भी दलितों का खास महत्व रहा है। सामाजिक क्षेत्र में अपने काम की शुरुआत में ही उन्होंने दलित समाज के साथ खुद को जोड़ा था। उन्होंने कहा कि जब उनके गांव के दलित परिवारों पर 60 हजार का कर्ज हो गया था, तब उन्होंने उनके लिए श्रमदान कर खेती करवाई और इस तरह आखिरकार दलितों ने कर्ज लौटाया। अन्ना ने याद दिलाया कि उनके गांव में दलित से ले कर सवर्णो तक की सामूहिक शादी एक ही मंडप में होती है और एक साथ खाना खाते हैं। उधर, सोमवार देर रात को अन्ना की सहयोगी किरण बेदी ने दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम सैयद अहमद बुखारी को जा कर अपने पक्ष में समझाने की कोशिश की। उन्होंने बुखारी को रामलीला मैदान आ कर इस आंदोलन को समर्थन देने की अपील भी की। इसका असर यह हुआ कि एक दिन पहले आंदोलन के विरोध में बयान दे चुके बुखारी ने चुप्पी साध ली। इसी तरह अन्ना ने अपने आंदोलन के गांधीवादी स्वरूप को बरकरार रखने पर भी पर्याप्त तवज्जो दी। उन्होंने अपने छोटे से संबोधन में अहिंसक तरीके पर कायम रहने पर काफी जोर दिया। मंगलवार को बिगड़ती सेहत के बावजूद उन्होंने दोपहर में लोगों को संबोधित किया। श्रीश्री रविशंकर भी दिन में दो बार उनसे मिलने आए। दो पूर्व कानून मंत्रियों- शांति भूषण और राम जेठमलानी के साथ भी उन्होंने चर्चा की।
Thursday, August 25, 2011
दलितों, मुसलमानों को जोड़ने में जुटी टीम अन्ना
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