: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जज ने भी अन्ना हजारे को पत्र लिखकर उनका खुले तौर पर समर्थन किया है। मगर साथ ही रिटायर्ड जज मंगत राम वर्मा ने जन लोकपाल के असीमित अधिकार को लेकर भी चिंता जाहिर की है। मंगत राम वर्मा ने पत्र के माध्यम से अन्ना हजारे के सत्याग्रह को सफलता प्रदान करने की कामना की है और भ्रष्टाचार के उन्मूलन को लेकर उनकी लड़ाई को सही ठहराया है। उन्होंने अन्ना से आग्रह किया है कि जन लोकपाल ऐसा न हो जिससे कि संविधान के मूलभूत सिद्धांत चैक एंड बैलेंस को खतरा पहंुचे। उनके अनुसार संविधान तीन अंगों विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में किसी को भी सार्वभौम सत्ता न देकर एक दूसरे की निरंकुश प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की व्यवस्था कर राज कार्य में सामंजस्य स्थापित करने का प्रावधान करता है। हालांकि भ्रष्टाचार शासन व उसकी व्यवस्थाओं में उच्च स्तर से निम्न स्तर तक व्यापक है। संपन्न व सशक्त लोग अपने काम बनाने के लिए उसे और अधिक प्रोत्साहित करते हैं। इसका समूल नष्ट होना देश के लिए सुखद भविष्य के लिए और हर वर्ग के लोगों तक लोकतंत्र का लाभ पहंुचाने के लिए अनिवार्य है, लेकिन यह काम संविधान के मूलभूत सिद्धांतों से छेड़छाड़ किए बिना होगा तो देश व लोकतंत्र के लिए हितकारी साबित होगा।

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