Tuesday, August 30, 2011

मनरेगा में लूट पर समिति ने सरकार को लताड़ा

, नई दिल्ली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर संसद की स्थायी समिति ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। योजना में मजदूरों को भुगतान की प्रणाली में भारी गड़बड़ी को बानगी भर बताते हुए स्थायी समिति ने आशंका जताई है कि हालात कहीं ज्यादा नाजुक हैं। समिति ने ग्रामीण विकास और डाक विभाग के आंकड़ों में भारी अंतर पर सवाल खड़ा किया है। स्थायी समिति ने मनरेगा के भ्रष्टाचार का खुलासा करते हुए कहा कि मजदूरी के भुगतान में मिली गड़बडि़यों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। यह बहुत विकराल है। डाकघरों के मार्फत मनरेगा के मजदूरों को दी जाने वाली मजदूरी में जो भ्रष्टाचार पकड़ में आया है, समिति उससे भौंचक है। यह कहानी का बहुत छोटा हिस्सा है। असल मसला अत्यंत गंभीर है। समिति के मुताबिक बिचौलियों की भूमिका, फिरौती मांगने और निर्धारित मजदूरी से कम भुगतान की घटनाएं सामने आई हैं। स्थायी समिति ने भ्रष्टाचार के दर्ज मामले, मनरेगा के मजदूरों के खातों की संख्या, डाक विभाग और ग्रामीण विकास विभाग से बांटी गई मजदूरी के आंकड़ों में भारी अंतर पाया है। इनमें दूर-दूर तक तालमेल नहीं है। ग्रामीण विकास विभाग के रिकॉर्ड में मजदूरी वितरण में भ्रष्टाचार के कुल 244 मामले दर्ज किए गए है। जबकि डाक विभाग के रिकार्ड में धोखाधड़ी के मामले केवल सात दर्ज हैं। राव इंद्रजीत सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने आकड़ों की इस गड़बड़ी को गंभीरता से लेते हुए सख्त नाराजगी जताई है। समिति की रिपोर्ट में 2008-09 के दौरान के खातों की संख्या में 10 लाख का हेरफेर और 290 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का जिक्र किया है। समिति ने मनरेगा के मामले में दोनों विभाग की कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान लगाया है।


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