, नई दिल्ली रामलीला मैदान से राजनीतिज्ञों की मंशा पर उठ रहे सवालों के बीच शनिवार को भाजपा ने खुद को अलग और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में आगे दिखाने की कोशिश की। संसद में चर्चा का पूरा फायदा उठाते हुए दोनों सदनों में भाजपा ने जहां भ्रष्टाचार का पूरा ठीकरा संप्रग सरकार पर फोड़ा वहीं अन्ना के लोकपाल के साथ जनमानस को अपने साथ जोड़ने का दांव भी खेल दिया। दूसरे दलों की तरह ही एक-दो दिन पहले तक अन्ना की शर्तो से थोड़ी असहमत भाजपा शनिवार को पूरी तरह अन्ना के साथ खड़ी दिखी। एक ही कानून के तहत केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति, निचले स्तर के अधिकारियों को इसके दायरे में लाने तथा सिटीजन चार्टर जैसी अन्ना की तीनों शर्तो पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने पूरा समर्थन दिया। पहले लोकपाल और लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर हर दल में उलझन रही थी, लेकिन भाजपा के इन दोनो नेताओं ने कानूनी धाराओं का उल्लेख करते हुए अन्ना की इस मांग को धार दे दी। प्रधानमंत्री को इसके दायरे में लाने की पुरजोर मांग करते हुए दोनों नेताओं ने कहा कि आइपीसी और सीआरपीसी से जब प्रधानमंत्री को छूट नहीं है तो फिर लोकपाल से उन्हें अलग रखना अनुचित है। यह और बात है कि भाजपा कुछ अपवादों के साथ पीएम को दायरे में लाने के पक्ष में है। सही मायने में सिर्फ न्यायपालिका और संसद के अंदर सदस्यों के आचरण को लोकपाल के दायरे में लाने के मुद्दे को छोड़ दें तो भाजपा ने पूरी तरह जन लोकपाल को अपना लिया। उसमें भी चर्चा के बीच सुषमा और जेटली ने सरकार की दुविधा की ओर से भी ध्यान दिलाया। शुक्रवार से शनिवार के बीच सरकार में लगातार रहे असमंजस का हवाला देते हुए उन्होंने परोक्ष आरोप लगाया कि सरकार अंतिम दम तक इससे बचने की कोशिश में लगी रही। जबकि भाजपा ने मत विभाजन के साथ चर्चा का नोटिस देकर गंभीर पहल की थी। न्यायपालिका के लिए सुषमा और जेटली ने न्यायिक आयोग के गठन का सुझाव दिया, जिसे कुछ दूसरे दलों ने भी माना। सीबीआइ की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई को लोकपाल में लाने के मुद्दे पर बहस छिड़ी है, लेकिन भाजपा इसे भी तर्कसंगत मानती है। इतना ही नहीं, टीम अन्ना की तरफ से लोकपाल विधेयक के लिए समय सीमा रखने का दबाव बनाने को भी उन्होंने एक सीमा तक जायज बता दिया। उन्होंने याद दिलाया कि 40 साल में आठ बार लोकपाल विधेयक संसद आकर दम तोड़ गया। सुषमा ने सीवीसी के चयन से लेकर 2जी और सीडब्ल्यूजी जैसे घोटालों का हवाला देते हुए कहा कि इस भ्रष्टाचार के चलते ही जनता का आक्रोश उभरा और वह इसके खिलाफ सख्त कानून चाहती है। सिटीजन चार्टर की बात उठी तो सुषमा और जेटली ने बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात जैसे राजग शासित राज्यों को श्रेय देते हुए बढ़त बनाने की कोशिश की। जेटली ने फोन टैपिंग के अधिकारों पर जरूर सवाल उठाया।
Tuesday, August 30, 2011
पूरी ताकत के साथ अन्ना के साथ खड़ी हुई भाजपा
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment