Thursday, August 25, 2011

तपोभूमि में हर किसी को है तरने की चाहत

नई दिल्ली मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारों में जो न हो सका वह अन्ना की तपोभूमि ने कर दिखाया। देशभक्ति के जज्बे से सराबोर होकर रामलीला मैदान पहुंच रहे लोगों में कई ऐसे भी हैं जिनका हृदय परिवर्तित हो रहा है। रोज नए संकल्प लिए जा रहे हैं। भ्रष्टाचार मुक्त जीवन जीने के नए नियम निर्धारित हो रहे हैं। युवा भी अनुशासित जीवन का पाठ सीखते नजर आ रहे हैं। मंच पर विराजमान अन्ना की एक झलक देखने को लोगों की कतारें यहां किसी भी कोने में खड़े होकर देखी जा सकती हैं। इनमें कई ऐसे लोग भी हैं जो हाथ जोड़कर न सिर्फ मंच पर लेटे अन्ना को एकटक निहार लेते हैं बल्कि उसी क्षण मन में संकल्प भी धारण कर लेते हैं। वहीं देशभक्ति के तरानों पर नाचती झूमती भीड़ देख कई आंखें गलतियों को याद कर नम भी हो रही हैं। दरियागंज निवासी देवेंद्र चौहान को ही ले लें। मैं अन्ना जी का गुनाहगार हूं लिखी तख्ती लेकर पिछले कई दिनों से रामलीला मैदान में घूम रहे हैं। बगल से गुजरने वाला हर व्यक्ति उनके पास रुककर उनके द्वारा किए जा रहे प्रायश्चित को पढ़ता है। लेकिन देवेंद्र के चेहरे पर कोई शिकन नहीं। वह खुले मन से कहते हैं कि अन्ना के दरबार में आकर उन्हें अहसास हुआ कि उन्होंने अपने मताधिकार का गलत प्रयोग किया है। इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने आए हैं। ऐसे अनगिनत लोग रामलीला मैदान के पंडाल में घूम रहे हैं जिनको या तो कहीं रिश्र्वत देनी पड़ी अथवा जिन्होंने अनुचित तरीके से अपना काम करवाया। सभी सुधरने का दावा कर रहे है।


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