अन्ना के जन लोकपाल पर आगे दिखने के लिए कांग्रेस और भाजपा में संसद और उसके बाहर होड़ मच गई है। भाजपा सांसद वरुण गांधी के बाद शुक्रवार को लोकसभा में पार्टी के उपनेता गोपीनाथ मुंडे और अनंत कुमार ने रामलीला मैदान पहुंचकर बढ़त बनाने की कोशिश की। कार्य मंत्रणा समिति में भाजपा ने मतविभाजन के जरिए चर्चा (नियम 184) पर जोर दिया। हालांकि, इसे भी शह-मात के खेल के रूप में ही देखा जा रहा है। खास तौर पर तब जबकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि चर्चा मतदान के बिना (नियम 193 के तहत) होगी। पहले जन लोकपाल और अब उस पर चर्चा ने राजनीतिक रंग ले लिया है। यही कारण है कि पिछले दस दिन से राजनीतिक दलों में छाई चुप्पी अब खत्म हो गई है। दरअसल भ्रष्टाचार के इस मुद्दे पर हर किसी के लिए चुनौती बढ़ गई है कि जनता के सामने वह ज्यादा साफ दिखे। लिहाजा जहां जनता के सामने नेताओं ने अपनी एकजुटता दिखाई। कांग्रेस के संदीप दीक्षित और जगदंबिका पाल ने जन लोकपाल समेत दूसरे सभी ड्राफ्ट पर चर्चा के लिए नोटिस दिया। लोकसभा अध्यक्ष ने उसे अनुमति भी दे दी, लेकिन भाजपा ने विश्वास में नहीं लिए जाने का हवाला देते हुए उस पर आपत्ति जता दी। अब भाजपा ने शनिवार को मत विभाजन के नियम (नियम 184) के तहत चर्चा कराने का नोटिस दिया है। बताते हैं कि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने सुझाव दिया है कि या तो 184 के तहत चर्चा हो या फिर पहले प्रधानमंत्री बयान दें और उस पर चर्चा हो। उनका प्रस्ताव भी कांग्रेस से अलग है। रालोद के जयंत चौधरी भी मतदान के पक्ष में हैं और वामदल भी। जाहिर है कि विपक्ष ने कांग्रेस और सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। सूत्रों का मानना है कि कोई भी दल अन्ना के पूरे लोकपाल पर मत विभाजन नहीं चाहता है। (पेज-2,3,4 देखें)
Sunday, August 28, 2011
श्रेय लूटने की होड़ में कांग्रेस-भाजपाश्रेय लूटने की होड़ में कांग्रेस-भाजपा
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