Thursday, August 25, 2011

लोकपाल से डर रहे सीबीआइ अफसर

, नई दिल्ली सीबीआइ को लोकपाल के दायरे में लाने के लिए सरकार की रजामंदी के साथ ही देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी के अधिकारियों की चिंता बढ़ने लगी है। चिंता इस बात की कि यदि सीबीआइ को लोकपाल के अधीन कर दिया गया तो जांच एजेंसी के रूप में उसका स्वतंत्र अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। अधिकारी जांच एजेंसी के रूप में सीबीआइ के पिछले सात दशक में किए गए कामों की दुहाई दे रहे हैं। गौरतलब है कि टीम अन्ना की एक अहम मांग सीबीआइ की भ्रष्टाचार निरोधक इकाइयों को लोकपाल के अधीन करने की है और सरकार ने इस पर अपनी सहमति भी दे दी है। इस संबंध में पूछे जाने पर सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक इकाइयों को निकाल देने के बाद सीबीआइ के पास कुछ नहीं बचेगा। एजेंसी में 90 फीसदी अधिकारी व कर्मचारी भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में कार्यरत हैं। मात्र 10 फीसदी कर्मचारी ही विशेष अपराध शाखा, इंटरपोल या अन्य इकाइयों में कार्यरत हैं। यदि भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को सीबीआइ से अलग कर दिया जाए तो सीबीआइ का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। सीबीआइ को लोकपाल के अंतर्गत लाये जाने की संभावना से चिंतित एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सीबीआइ को लोकपाल के नियंत्रण में भले ही दे दिया जाए, पर जांच एजेंसी के रूप में उसका स्वतंत्र अस्तित्व भी बना रहना चाहिए। उनके अनुसार सरकार के नियंत्रण में होने के बावजूद सीबीआइ ने जांच एजेंसी के रूप में एक अलग पहचान बनाई है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।


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