Tuesday, August 30, 2011

विपक्ष के निशाने पर आए राहुल गांधी

, नई दिल्ली लोकसभा में शुक्रवार को शून्यकाल में लंबा भाषण देकर राहुल गांधी विपक्ष के सीधे निशाने पर आ गए। शनिवार को अन्ना हजारे के प्रस्ताव के मुताबिक लोकपाल पर संसद में हुई बहस के दौरान भाजपा और वामदलों ने यूपीए सरकार में एक से ज्यादा शक्ति केंद्रों की बात कह सरकार के मतभेदों पर प्रहार किया। नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने राहुल के भाषण को प्रवचन और राष्ट्र के नाम संदेश करार देते हुए कहा कि कांग्रेस महासचिव ने अन्ना हजारे का अनशन तुड़वाने के लिए प्रधानमंत्री की सदाशयता भरी कवायद पर पानी फेर दिया। भाकपा के गुरुदास दासगुप्ता ने भी कहा कि राहुल का बयान प्रधानमंत्री की भावना से मेल नहीं खाता। शनिवार को संसद के विशेष सत्र में जन लोकपाल के मुद्दे पर लोकसभा में चर्चा के दौरान पूरी रौ में दिख रहीं सुषमा ने सरकार को कई बार असहज किया। खासतौर से शुक्रवार को सदन में राहुल के बयान पर सरकार और कांग्रेस पर ऐसे कटाक्ष किए कि कांग्रेसी संसद और कई मंत्री तिलमिला उठे। सुषमा ने कहा कि एक दिन पहले प्रधानमंत्री ने स्टेट्समैनशिप दिखाई और लोकसभा ने अन्ना से अनशन तोड़ने की अपील जारी की। लग रहा था कि समाधान निकल आया, लेकिन अचानक सरकार पलट गई। फिर बाद में राहुल के बयान से समझ में आया कि आखिर प्रधानमंत्री के बयान के बाद भी ऐसा क्यों हुआ? लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री को लाने के सवाल पर उठे शोरगुल के बीच उन्होंने सामने बैठे मनमोहन सिंह की तरफ इशारा किया और कहा कि वह तो चाहते हैं खुद को लाना, लेकिन आप लोग उनकी सुनते ही कहां हैं। इस पर खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मुस्कराए बगैर नहीं रह सके। स्वराज ने समाधान की ओर बढ़ रही बातचीत के लिए फिर प्रधानमंत्री को बधाई के बहाने कटाक्ष किया कि उन्होंने फिर कमान अपने हाथ में ले ली है। इस बीच सुषमा स्वराज ने लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को भी नहीं बख्शा। लोकसभा अध्यक्ष से सुषमा स्वराज ने कहा कि कांग्रेस महासचिव को आपने विशेषाधिकार का प्रयोग कर बिना सूची में नाम हुए बोलने की अनुमति दी.। दूसरों को भी देती हैं। दूसरी बार संसद में चुनकर आए कांग्रेस महासचिव को पांच पेज का 15 मिनट का प्रवचन करने दिया। यह क्या था? राष्ट्र के नाम संदेश! श्रीकांत जेना ने उन्हें लोकसभा अध्यक्ष पर सवाल करने के लिए टोका तो पवन बंसल ने विषय की तरफ ध्यान दिलाया। मगर सुषमा अन्ना के साथ दिखने और कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करने का कोई मौका नहीं चूकीं। भाकपा नेता गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि जिस तरह से शुक्रवार को राहुल गांधी का बयान हुआ, उससे एक बात साबित हो गई कि वहां पर एक से ज्यादा शक्ति केंद्र हैं।


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