नई दिल्ली लोकपाल विधेयक पर टीम अन्ना की तीन शर्तो पर संसद में हुई चर्चा के दौरान कारपोरेट हाउस, मीडिया और स्वयंसेवी संगठन (एनजीओ) सांसदों के निशाने पर रहे। इनको लोकपाल के दायरे में लाने की मांग उठाने वालों में क्षेत्रीय दलों के नेता सबसे ज्यादा मुखर थे। यह बात अलग है कि उन्हें सबसे ज्यादा समर्थन सत्ता पक्ष की बेंचों से मिल रहा था। कांग्रेस के संदीप दीक्षित, सपा के रामगोपाल यादव व भाकपा के गुरुदास दास गुप्ता ने कारपोरेट घरानों व एनजीओ पर भी लोकपाल की नजर रखने की बात कही। विभिन्न दलों के कई सदस्यों ने परोक्ष रूप से बड़े औद्योगिक घरानों का उल्लेख करते हुए कहा, 2जी स्पेक्ट्रम मामले में इनकी भूमिका सार्वजनिक हो चुकी है। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है तो इन पर भी नजर रखनी होगी। खुद 15 सालों तक एनजीओ से जुड़े रहे संदीप दीक्षित ने गैर सरकारी संगठनों पर अंकुश लगाने की अपील करते हुए कहा, इन्हें बिना लगाम के छोड़ दिया गया तो यह निरंकुश हो जाएंगे। जदयू नेता शरद यादव और राजद के लालू प्रसाद शनिवार को भी मौका नहीं चूके। दोनों नेताओं का कहना था कि अन्ना का पूरा आंदोलन मीडिया की देन है। मीडिया इसे दिखाना बंद कर दे तो यह ऐसे ही खत्म हो जाएगा। प्रिंट मीडिया से अधिक उनकी नाराजगी इलेक्ट्रानिक मीडिया पर थी। शरद यादव ने तो हाथ जोड़कर अपील की और कहा अब तो बख्श दीजिए।

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