Saturday, August 27, 2011

भाजपा सड़क से संसद तक अन्ना हजारे के साथ

, नई दिल्ली लोकपाल के मुद्दे पर भाजपा ने अपने अंतर्विरोधों को दरकिनार करते हुए अन्ना हजारे के जन लोकपाल विधेयक को आधार बनाकर संसद में बहस कराने की मांग की है। पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने अन्ना को पत्र लिखकर संसद से सड़क तक उनके आंदोलन का समर्थन किया है। गडकरी ने सरकार से अन्ना को लिखित आश्वासन देने व इस मामले में संसद को प्रक्रियाओं में न बांधने की भी मांग की ताकि अन्ना का अनशन जल्द से जल्द खत्म हो सके। वहीं, शाम को टीम अन्ना ने भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी से उनके आवास पर भेंट की और संसद के भीतर जन लोकपाल के लिए समर्थन मांगा। सरकार व टीम अन्ना के बीच चल रहे टकराव के बीच अपनी भूमिका साफ न करने के लिए भाजपा पार्टी के भीतर व बाहर हो रही आलोचनाओं से उबर आई है। पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इसकी पहल करते हुए अन्ना को पत्र लिखकर उनको अपना पूरा समर्थन दिया। गडकरी का पत्र लेकर महासचिव जेपी नड्डा व विनय सहस्त्रबुद्धे अन्ना से मिले और जन लोकपाल विधेयक पर उनका समर्थन किया। अन्ना ने इनसे यह मामला संसद में उठाने को कहा। इसके बाद गडकरी ने खुद इस मुद्दे पर पार्टी का रुख स्पष्ट किया। गौरतलब है कि बुधवार को भाजपा संसदीय दल की बैठक में वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने पार्टी के स्पष्ट लाइन न लेने के लिए नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद पार्टी में हलचल भी हुई और शाम को सर्वदलीय बैठक में पार्टी ने सरकारी लोकपाल को खारिज करते हुए अन्ना के जन लोकपाल विधेयक को दृष्टि में रखते हुए संसद में नया विधेयक लाने की मांग भी की। इस बैठक के दौरान भाजपा नेताओं ने प्रणब मुखर्जी के साथ अलग से हुई बैठक में एक ऐसे प्रस्ताव का खाका भी तैयार किया, जिसमें अन्ना की भावना का ख्याल रखा गया था, लेकिन सरकार के भीतर मतभेदों के चलते यह प्रस्ताव सामने नहीं आ सका। सूत्रों के अनुसार भाजपा ने लोकपाल से जुड़े विवाद वाले पांच मुद्दों पर अपनी राय भी साफ कर दी है। देर रात टीम अन्ना के साथ हुई चर्चा में भाजपा नेताओं ने साफ किया कि वे प्रधानमंत्री को इसके दायरे में लाने पर सहमत हैं, साथ ही पार्टी न्यायपालिका के लिए अलग से न्यायिक आयोग के पक्ष में भी है। सासंदों के सदन से बाहर के आचरण को इसकी परिधि में लाने व लोकपाल चयन समिति में सरकार के बाहर का बहुमत रखने के भी हक में है। लोकपाल को हटाने के मामले में भी पार्टी सरकार को अधिकार देने के बजाए महाभियोग की प्रक्रिया अपनाने के पक्ष में है। भाजपा शुक्रवार को सदन में होने वाली बहस में अपने इन मुद्दों को पूरी ताकत से रखेगी।


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