नई दिल्ली अन्ना हजारे के अनशन के आठवें दिन उनकी सेहत बिगड़ने की आशंका ने सरकार की हालात खराब कर दी और वह समाधान तलाशने के लिए सिर के बल खड़ी नजर आई। सुबह से शाम तक बैठकों के दौर चलते रहे। मध्यस्थों के जरिये बात कर रही सरकार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दखल के बाद औपचारिक वार्ता के रास्ते खोलने पर मजबूर हो गई। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अन्ना को पत्र लिखकर अनशन तोड़ने की अपील की, साथ ही अपने सबसे वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री प्रणब मुखर्जी को वार्ता की जिम्मेदारी सौंपी। रात 10 बजे तक नॉर्थ ब्लाक में टीम अन्ना के साथ दो घंटे से ज्यादा समय तक गतिरोध तोड़ने का फार्मूला तलाशने पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने पर सरकार सहमत हो गई, लेकिन तीन मुद्दों पर मामला अटक गया और बैठक बेनतीजा रही। इसके बाद प्रधानमंत्री ने आपात बैठक बुलाई। वार्ता में सरकार की तरफ से प्रणब के अलावा कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे सांसद संदीप दीक्षित भी थे। टीम अन्ना से अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण और किरण बेदी बैठक में शामिल हुए। बैठक के बाद टीम अन्ना ने कहा कि हमारी लोकपाल के मुद्दे पर अच्छे वातावरण में बात हुई, सरकार ने कल तक अपना मत देने को कहा है। कल हमारी बैठक फिर होगी। टीम अन्ना ने कहा कि उनकी तीन मांगों पर मामला अटका हुआ है। एक, स्थायी समिति में ले जाए बिना जन लोकपाल बिल संसद में पेश किया जाए और इसी सत्र में पारित किया जाए। जरूरी हो तो संसद सत्र बढ़ाया भी जाए। दो, लोकपाल के दायरे में छोटे कर्मचारी भी लाए जाएं और तीन, सरकार अपना लोकपाल बिल वापस ले। उन्होंने साफ किया कि इन मुद्दों पर लिखित आश्र्वासन से कम पर वह अन्ना हजारे को नहीं मना सकेंगे। बैठक की अध्यक्षता कर रहे प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार ने बुधवार तक का समय मांगा है। सर्वदलीय बैठक में सभी राजनीतिक दलों और प्रधानमंत्री से चर्चा कर आगे बात बढ़ाई जाएगी। सूत्रों के मुताबिक अन्ना से औपचारिक बातचीत शुरू करने के पीछे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का निर्देश रहा। अमेरिका में इलाज करा रहीं सोनिया ने प्रधानमंत्री और साथ ही अपने राजनीतिक सचिव अहमद पटेल से पूरे हालात पर चर्चा की। टीम अन्ना और सरकार के बीच प्रमुख मुद्दों पर मतभेद जस के तस के बने रहने के बावजूद कांग्रेस के उच्चपदस्थ सूत्रों ने दावा किया कि शीघ्र समाधान हो जाएगा। सोनिया के नजदीकी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष पूरे मामले पर नजर रखे हैं। सभी महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर उनसे बातचीत हो रही है। एक हफ्ते के भीतर उनकी स्वदेश वापसी की भी संभावना है। हम निचले स्तर के भ्रष्टाचार पर भी अन्ना की चिंताओं पर काम कर रहे हैं। यह अन्ना की बिगड़ती सेहत पर देशव्यापी प्रतिक्रिया की चिंता और सोनिया के हस्तक्षेप का असर रहा कि प्रधानमंत्री ने पहले लोकपाल बिल पर गौर कर रही संसदीय समिति के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी के साथ करीब डेढ़ घंटे तक चर्चा की, फिर उनकी प्रणब मुखर्जी और एके एंटनी के साथ बैठक हुई। इसके बाद टीम अन्ना से बातचीत के लिए प्रणब मुखर्जी को अधिकृत किया गया। प्रणब ने केंद्रीय मंत्री विलास राव देशमुख और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के साथ चर्चा की। शाम को फिर प्रधानमंत्री और राहुल गांधी की भी बैठक हुई। इसके बाद अपनी तरफ से बातचीत न करने के अपने पुराने रुख से पीछे हटते हुए सरकार की ओर से टीम अन्ना को औपचारिक वार्ता का संदेश कानून मंत्री सलमान खुर्शीद की तरफ से गया।
Thursday, August 25, 2011
वार्ता शुरू लेकिन नहीं बनी बात
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