Thursday, August 25, 2011

लोकपाल पर यशवंत-शत्रुघ्न खड़े हुए भाजपा के खिलाफ

, नई दिल्ली भ्रष्टाचार व लोकपाल के मुद्दे पर ढुलमुल रवैए को लेकर भाजपा को अब अपने ही सांसदों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी संसदीय दल की बैठक में इस मुद्दे पर तीन वरिष्ठ नेताओं यशवंत सिन्हा, शत्रुघ्न सिन्हा व उदय सिंह ने अनिर्णय के लिए नेतृत्व को कठघरे में खड़ा करते हुए अपने इस्तीफे की पेशकश भी कर दी। तीनों का दो टूक कहना था अनिर्णय की स्थिति से पहले महंगाई और अब भ्रष्टाचार का मुद्दा पार्टी के हाथ से निकल कर दूसरों के हाथ में चला गया है। बुधवार को हुई पार्टी संसदीय दल की बैठक में भाजपा ने एक प्रस्ताव पारित कर अन्ना हजारे के अनशन व उनके गिरते स्वास्थ्य पर गहरी चिंता जताई व अनशन समाप्त करने की अपील की। इस प्रस्ताव पर गहरा आश्चर्य जताते हुए यशवंत सिन्हा ने कहा, पार्टी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर स्पष्ट रुख क्यों नहीं अपना रही है। लोकपाल के मुद्दे पर पार्टी जनता के बीच अपना स्पष्ट रुख रखने में विफल रही है। इससे भ्रम की स्थिति बढ़ रही है। पार्टी को स्पष्ट रुख बताना चाहिए, इस बारे में केवल जुबानी जमा खर्च से काम नहीं चलेगा। सूत्रों के अनुसार इस मामले में यशवंत सिन्हा अकेले नहीं पड़े। शत्रुघ्न सिन्हा व उदय सिंह ने भी उनका साथ दिया और उन्होंने भी इस्तीफा देने की पेशकश कर दी। हालांकि एक सांसद उनके आरोपों का विरोध करते भी दिखे। बाद में लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने सिन्हा के इन आरोपों को नकारा कि पार्टी ने कोई स्पष्ट रुख नहीं लिया। उन्होंने साफ किया कि पार्टी ने संसद के भीतर चर्चा में लोकपाल विधेयक के प्रावधानों पर अपनी दो टूक राय रखी। बाद में राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने भी अन्ना हजारे के अनशन व लोकपाल के मुद्दे पर साफ किया कि इस बारे में पार्टी को कोई नरम रवैया नहीं रहा। जिन प्रमुख मुद्दों पर भाजपा ने राय दी है, उसी राय पर अब सभी सहमत हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, विनय कटियार ने भी कड़े तेवर दिखाते हुए आडवाणी के बयान पर प्रतिक्रिया देने पर राज्यसभा में पार्टी के उप नेता एस एस अहलूवालिया को आड़े हाथ लिया। गौरतलब है कि अहलूवालिया ने एक दिन पहले आडवाणी के प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगने के बयान से किनारा कर लिया था। कटियार ने कहा,इसमें कौन सी दो राय हैं कि यह सरकार लोगों का विश्वास खो चुकी है।


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