Thursday, August 25, 2011

भ्रष्टाचार पर बहस के दौरान आपस में उलझे सांसद

भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्यसभा में चल रही बहस के दौरान बिहार के सदस्यों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता साफ-साफ दिखाई पड़ी। जनता दल (यू) और राजद-लोजपा के सदस्य एक-दूसरे से भिड़ गए। कुछ ऐसी ही स्थिति तमिलनाडु के मामले में देखने को मिली और अन्नाद्रमुक तथा द्रमुक सदस्यों के बीच भी तीखी नोंकझोंक हुई। बिहार से जनता दल (यू) के रामचंद्र प्रसाद सिंह ने भ्रष्टाचार के मूल में सांसद और विधायक कोटा समाप्त करने की जब सलाह दी तो कांग्रेस और भाजपा के भी कुछ सदस्यों ने यह कहते हुए विरोध करना शुरू कर दिया कि कुछ लोगों के कारण सांसद विकास निधि को समाप्त करने की बात करना उचित नहीं है। सिंह का कहना था कि 93 के पहले जब एमपी फंड नहीं था, तब भी एमपी-एमएलए की अनुशंसा पर योजनाएं ली जाती थीं। तब सदस्यों की साख होती थी। इसके बाद इसमें तेजी से गिरावट हुई है। जनता में गलत मैसेज जा रहा है। एमपी-एमएलए कमीशन के बिना फंड नहीं देते। बिहार सरकार ने जिस तरह से विधायक फंड को समाप्त किया है उसी तरह सांसद निधि को भी खत्म कर देना चाहिए। इस पर राजद के रामकृपाल यादव ने कहा कि बिहार की बात मत कीजिए। वहां घोटाले क्या कम हो रहे हैं। इस पर जद (यू) के एनके सिंह और अली अनवर विरोध में खड़े हो गए। अली अनवर और रामकृपाल के बीच नोंकझोंक भी हुई। इसी तरह लोजपा के रामविलास पासवान ने जब अन्ना के मंच से वंदेमातरम का उद्घोष किए जाने का मामला उठाते हुए कहा कि इससे मुस्लिम समाज में भय व्याप्त हो रहा है। इस पर जद (यू) के अली अनवर ने कहा ऐसा कहकर समाज में भ्रम मत फैलाइए। अन्ना का आंदोलन देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ है। इसमें सभी जाति और धर्म के लोग शामिल है। इस पर रामविलास बोले भ्रष्टाचार की बात मत कीजिए। बिहार में साठ हजार करोड़ से अधिक के एसी-डीसी बिल घोटाले पर क्यों नहीं बोलते। पासवान के ऐसा कहते ही जद (यू) के सदस्य उनका विरोध करने लगे। बिहार की तरह ही तमिलनाडु के अन्नाद्रमुक और द्रमुक के सदस्य भी उस समय एक-दूसरे से उलझ पड़े जब मनोज पांडियन ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्र सरकार ने समय रहते कड़ा रुख अख्तियार किया होता तो 2जी स्पेक्ट्रम जैसे बड़े घोटाले नहीं होते। एआइडीएमके के पांडियन के ऐसा कहते ही द्रमुक के सदस्य उनका विरोध करने लगे।


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