चिलचिलाती धूप में जमीन पर बैठे टीम अन्ना के कार्यकर्ताओं के बीच ये दो लोग कौन हैं? औरों की तरह अन्ना टोपी लगाए। वैसे ही पसीने में भीगे! मगर यह क्या.? बार-बार लोग इनके पास आ कर तस्वीर क्यों खिंचवा रहे हैं? नजदीक पहुंचने पर पता चला कि इनमें से एक भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार मनोज तिवारी हैं तो दूसरे कॉमेडी किंग राजू श्रीवास्तव। लोग इन कलाकारों के और ये कलाकार अन्ना के फैन हैं। क्या अन्ना भी इनकी कला के कद्रदान हैं? राजू कहते हैं, अन्ना ने एक-आध बार देखे हैं मेरे शो। कल जब मैं उनसे मिला तो उन्होंने कहा, इसी तरह पूरी ईमानदारी से करते रहना अपना काम। यह भी समाज की सेवा है। मनोज कहते हैं, वे खुद चल कर मेरी तरफ आए और मुझे आशीर्वाद दिया। मेरे लिए इतना काफी है। वह जोड़ते हैं, यहां हम नहीं, अन्ना हैं स्टार। यह सब कोरी डायलॉगबाजी है या फिर मामले के पेंच भी जानते हैं? सवाल पर मनोज मुस्कराते हैं। फिर टीम अन्ना के दूसरे सदस्यों की तरह सारी बारीकियां समझाने में लग जाते हैं। राजू बीच में ही टोक कर कहते हैं, नीचे के अफसरों को लोकपाल के दायरे में लाना भी तो बेहद जरूरी है। पूछा गया कि आप लोग तो टीवी-सिनेमा के लोग हैं, मगर कोई सच्ची कहानी सुनाइए, भ्रष्टाचार की। मनोज तपाक से कहते हैं, दरोगा होते हम। 1996 में ही परीक्षा पास किए। दौड़ भी लगाए। मगर 65 हजार रुपये कहां से लाते। राजू के मुताबिक रेलवे में बड़े भाई की नौकरी के लिए डेढ़ लाख रुपये मांगे गए थे। आज भी खून खौल उठता है। अच्छा.. आप लोग यहां कब तक टिकेंगे? इस सवाल पर दोनों ही दृढ़ता से कहते हैं, जब तक अन्ना नहीं हटेंगे, हम भी यहीं डटेंगे। गंभीरता छोड़ राजू फिर मूड में आ जाते हैं। टीम इंडिया पर एक चुटकुला अपने अंदाज में सुनाते हैं, धौनी का फोन आया था। कह रहा था अन्ना को कहना, हमारा ही नहीं पूरी टीम का जोरदार समर्थन है। जब तक सरकार उनकी मांग नहीं मानेगी हम एक भी मैच नहीं जीतेंगे। प्रॉमिस। बाय। तनावग्रस्त टीम अन्ना ठहाके में डूब जाती है।

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