नई दिल्ली अन्ना की गंगा में सब डुबकी लगाना चाहते हैं। रामलीला मैदान में चल रहे आंदोलन में बुधवार को बाबा रामदेव भी पहुंचे, भाजपा सांसद वरुण गांधी भी आए और इस आंदोलन के खिलाफ खुलेआम बोल चुकी सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय भी। ऐसे में टीम अन्ना ने सबके लिए अलग-अलग जगह बनाई। अपने-अपने मकसद और इरादों के साथ आ रहे समर्थक बुधवार को टीम अन्ना के लिए अलग चुनौती बन गए। धर्मसंकट यह था कि आंदोलन की गंगा पर पहरा बिठाने का आरोप भी न लगे और यह मैली भी न होने पाए। जन लोकपाल को ले कर बार-बार सुर बदलते रहे बाबा रामदेव और अन्ना के रिश्तों में पड़ी खटास भी किसी से छुपी नहीं। अनशन शुरू करने के साथ ही अन्ना और उनके सहयोगी परेशान थे कि बाबा अपने समर्थन की टोकरी ले कर पहुंच गए तो क्या करेंगे। इसलिए रामलीला मैदान की इजाजत मिलते ही, सबसे पहले दो मंच बनवाए। एलान भी कर दिया मुख्य मंच सिर्फ अन्ना का। मगर बाबा इन संकेतों को समझने के लिए कतई तैयार नहीं थे। आखिरकार बुधवार को अनशन के नौवें दिन यहां पहुंच ही गए। ऐसे में अन्ना उनसे मिले भी और ढाई महीने पहले रामलीला मैदान के इसी मंच से खदेड़े जा चुके रामदेव को यहां से बोलने का मौका भी दिया। मगर बातचीत मंच के पीछे अपने आराम की जगह पर की और बोलने के लिए नीचे का दूसरा मंच दिया। ऐसा ही मामला रहा भाजपा सांसद वरुण गांधी का। भले ही वह पार्टी लाइन के खिलाफ जा कर जन लोकपाल के पक्ष में बयान देते रहे हों, लेकिन आए तो उन्हें जनता के बीच जमीन पर बैठना पड़ा। वरुण भी सब सोच कर आए थे। कहा, मैं किसी के साथ नहीं, जनता के साथ हूं। अन्ना के शामियाने में ऐसी ही एक और अनोखी मेहमान थीं सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) की सदस्य अरुणा राय। इन पर सरकारी इशारे पर जन लोकपाल के साथ-साथ अन्ना का भी विरोध करने का आरोप लग रहा है। ऐसे में ये जब रामलीला मैदान पहुंची तो अन्ना ने इन्हें जनता की लड़ाई लड़ने वाली बता इनका भी मन हल्का करने की कोशिश की।

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