Tuesday, August 30, 2011

क्षतिपूर्ति में जुटी कांग्रेस

नई दिल्ली अन्ना के अनशन से भ्रष्टाचार के मोर्चे पर चौतरफा फजीहत झेलने के बाद अब कांग्रेस नुकसान की भरपाई में जुट गई है। इसके तहत पार्टी अब सरकार पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय संगठन के विवेक पर ज्यादा भरोसा करेगी। टीम अन्ना सरकार के खिलाफ जनांदोलन की जमीन दोबारा तैयार न कर सके, इसके लिए पार्टी नेतृत्व पूरी तरह से कमान अपने हाथ में रखेगा। महासचिव राहुल गांधी अब इस पूरे प्रकरण पर मुख्य भूमिका में आ ही चुके हैं। अमेरिका से इलाज करा कर लौटते ही पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाकर इस पूरे घटनाक्रम की समीक्षा और आगे की दशा-दिशा तय करेंगी। कांग्रेस के शीर्ष सूत्रों ने दैनिक जागरण से कहा, प्रशासनिक फैसले तेजी से तो लिए जाएंगे, पर राजनीतिक बुद्धि को किनारे रख कर नहीं। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकार के किसी मंत्री या कांग्रेसी नेता के बयान या क्रियाकलाप से जनता के बीच सरकार के दंभी होने के संदेश न जाए। इसीलिए, कपिल सिब्बल और पी. चिदंबरम जैसे विशुद्ध प्रशासनिक दृष्टिकोणवादी नेताओं को टीम अन्ना से बातचीत करने और सार्वजनिक बयान देने से रोक दिया गया है। बरेली से कांग्रेस सांसद प्रवीण ऐरन ने तो राहुल गांधी को पत्र लिखकर इस मामले को बिगाड़ने में साजिश तक की शिकायत कर दी। पत्र में ऐरन ने सवाल उठाया है कि कहीं यह सब राहुल को प्रधानमंत्री बनने से रोकने या फिर ईमानदार प्रधानमंत्री को नुकसान पहुंचाने के लिए जानबूझकर तो नहीं किया गया। उनका इशारा सिब्बल और चिदंबरम की तरफ माना जा रहा है। हालांकि ऐरन के साजिश के आरोप से तो पार्टी नेतृत्व सहमत नहीं है, लेकिन वह मान रहा है कि मामले से निपटने में चूक दर चूक हुई, जिससे सरकार को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। सरकार की असली चिंता अब अन्ना के उस बयान को लेकर भी है जिसमें उन्होंने लोकपाल पर संसद में चर्चा को अधूरी जीत बताया है। जिस तरह से टीम अन्ना के राजनीतिक सुधार का एजेंडा बढ़ रहा है, उससे कांग्रेस अब खासी सतर्क है। इसीलिए, राहुल गांधी ने युवा मंत्रियों के साथ-साथ युवा सांसदों के साथ बैठक कर उन्हें इस मसले पर मुखरता के साथ जनता के बीच जाने को कहा है। कांग्रेस के युवा नेताओं को प्रणब मुखर्जी टिप्स भी दे रहे हैं। इतना ही नहीं, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी अमेरिका से इलाज कर इसी हफ्ते लौट रही हैं। सितंबर में वह कांग्रेस की सबसे ताकतवर इकाई कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक करेंगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ राहुल गांधी के बयान के मुताबिक, सरकार हरकत में दिखेगी। शीतकालीन सत्र से पहले अभिषेक मनु सिंघवी की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति लोकपाल कानून का नया मसौदा संसद भेज दिया जाएगा। पूरी कोशिश होगी कि टीम अन्ना को वार्ता में लगाए रखा जाए और उन्हें आंदोलन की जमीन तैयार करने का कोई मौका न मिले।


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