जागरण न्यूज नेटवर्क: अंतरराष्ट्रीय जगत में लीबिया के तानाशाह कर्नल मुअम्मर गद्दाफी के शासन के पतन की खबर छाई हुई है, लेकिन इसके बावजूद अन्ना के अनशन को मिल रही जबर्दस्त कवरेज कम नहीं आई है। अन्ना के आंदोलन के नौ दिन होने के बावजूद विदेशी मीडिया की पूरी दिलचस्पी उसमें बरकरार हैं : द टेलीग्राफ : ब्रिटेन के इस अखबार में कहा गया है कि अन्ना के अनशन की गूंज सरहद पार पाकिस्तान में सुनाई दे रही है। अन्ना के अनशन से प्रेरित होकर पाकिस्तान के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता अंसार बर्नी ने अपने देश से भ्रष्टाचार मिटाने का संकल्प लिया है। वह भ्रष्टाचार के खिलाफ एक अभियान छेड़ने जा रहे हैं। बर्नी पाकिस्तान के पहले मानवाधिकार मंत्री रह चुके हैं। वह ईद के बाद पूरे पाकिस्तान में अपनी भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम शुरू करेंगे। वॉल स्ट्रीट जर्नल: अन्ना के अनशन ने लोगों के बीच देश भक्ति की लहर पैदा कर दी है। बड़े शहरों से लेकर गांव तक रिक्शाचालक से लेकर, छात्र, धार्मिक नेता, व्यवसायी सभी अपने-अपने तरीके से तिरंगा झंडा लहराते हुए, वंदे मातरम का नारा बुलंद करते हुए अन्ना के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें से बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो बिल्कुल भी राजनीति में रुचि नहीं लेते लेकिन शायद अपने जीवन में पहली बार किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए सड़कों पर उतरे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स: अन्ना हजारे के अनशन को बौद्धिक वर्ग से सहानुभूति तो मिल रही है लेकिन कई लोग उनके तौर-तरीकों से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की पॉलिटिकल साइंटिस्ट जोया हसन का इस मामले में कहना है कि इस आंदोलन की प्रकृति ने एक प्रकार की चिंता उत्पन्न की है।
Thursday, August 25, 2011
अन्ना को लगातार देख रहा है विदेशी मीडिया
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