Sunday, August 28, 2011

आंदोलन सामाजिक ढांचे के लिए खतरनाक

जागरण ब्यूरो अन्ना हजारे से अनशन तोड़ने की प्रधानमंत्री और संसद की अपील के दूसरे दिन कांग्रेस ने अप्रत्याशित तरीके से राहुल गांधी को मैदान में उतारा। लोकपाल और अन्ना के अनशन पर 11 दिन बाद कांग्रेस महासचिव राहुल ने अपनी चुप्पी लिखित भाषण के जरिये लोकसभा में तोड़ी तो, लेकिन प्रधानमंत्री के बयान से अलग लाइन लेते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना के आंदोलन पर गंभीर सवाल उठा दिए। उन्होंने व्यवस्था से उपजे रोष को आवाज देने के लिए अन्ना को धन्यवाद दिया और लगे हाथ उनके लोकपाल को एक तरह से खारिज भी कर दिया। उन्होंने जल्द लोकपाल बनने की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए उसे संवैधानिक संस्था बनाने और साथ ही अन्य अनेक उपाय करने के भी सुझाव दे डाले। उन्होंने अच्छे उद्देश्य के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर न करने की नसीहत देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया लंबी और कठिन है, किंतु उसका लंबा होना उसके समावेशी और निष्पक्ष होने के लिए जरूरी है। उन्होंने अपने पांच सुझावों के जरिये एक प्रकार से अपना लोकपाल ही पेश कर दिया। राहुल ने अन्ना के आंदोलन को सामाजिक ढांचे और लोकतंत्र के लिए खतरनाक करार देते हुए दो टूक कहा कि सिर्फ लोकपाल से ही भ्रष्टाचार नहीं मिटने वाला। लोकसभा में अपने बयान के बाद राहुल ने बाहर यह भी दावा किया कि उनका बयान बाजी पलटने वाला है, जबकि विपक्षी नेताओं ने उसे रोड़े अटकाने वाला करार दिया। अपने संसदीय जीवन के 7 वर्षो में चौथी बार लोकसभा में मुंह खोलने वाले राहुल ने पूरे आंदोलन पर तीखा प्रहार किया। अपनी प्रकृति से विपरीत बेहद उत्तेजना और ऊंची आवाज में राहुल ने टीम अन्ना के जन लोकपाल की मांग से बड़ी लकीर खींचने कीकोशिश की और सुझाव दिया कि चुनाव आयोग की तरह संसद के प्रति जवाबदेह एक संवैधानिक लोकपाल बनाया जाए। लोकसभा में शून्यकाल में बिना लाटरी के सबसे ऊपर राहुल का नाम आने पर हंगामा भी हुआ। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच भारी हंगामे के चलते राहुल को बीच में रुकना भी पड़ा, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि उन्होंने राहुल को विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए पहले बोलने की अनुमति दी है। हंगामे और समर्थन के बीच राहुल ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग का पांच सूत्रीय फार्मूला तो रखा, लेकिन जहां प्रधानमंत्री ने 10 बार अन्ना का नाम लेते हुए उनसे अनशन तोड़ने की अपील की थी वहीं राहुल ने एक बार अन्ना का नाम तो लिया, लेकिन अनशन पर मौन ही रहे। राहुल ने अन्ना के आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि क्या जनप्रतिनिधि भ्रष्टाचार के खिलाफ इस सीधी जंग के लिए तैयार हैं? उन्होंने कहा कि ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जैसे एक कानून बन जाने से पूरे समाज से भ्रष्टाचार मिट जाएगा, लेकिन मुझे इसमें संदेह है। अन्ना के आंदोलन के खतरों से चेताते हुए राहुल ने कहा कि चुनी हुई सरकार ही संसद की सर्वोच्चता का संरक्षण करती है। आंदोलन के जरिये कानून बनाने पर उन्होंने कहा कि नीतिगत घुसपैठ लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। आज प्रस्तावित कानून भ्रष्टाचार के विरुद्ध है। कल ऐसी लड़ाई किसी ऐसे लक्ष्य के प्रति भी हो सकती है जिसमें सामूहिक सहमति न हो। वह लड़ाई हमारे बहुआयामी समाज और लोकतंत्र पर हमला हो सकती है। (भाषण का मूल पाठ, पेज 4 पर)


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