नई दिल्ली संसद में नौवीं बार पेश किए गया लोकपाल विधेयक अपने प्रावधानों से ज्यादा मनहूसियत के लिए ज्यादा जाना जाता है। पिछले आठ मौकों पर वह संसद के बाहर ही नहीं निकल सका, अलबत्ता सरकारें जरूर बदल गई। इस विधेयक को पेश करने वाली आधी सरकारें तो अपना कार्यकाल पूरा ही नहीं कर सकी और आधा दर्जन प्रधानमंत्री अगली बार सत्ता में नहीं लौटे। 1968 से अब तक केवल दो सरकारें ही ऐसी रहीं, जो लोकपाल को लेकर नहीं आई, उन्होंने बिना किसी झंझट के पांच साल पूरे किए। संसद में सबसे पहले एक मई 1968 को लोकसभा में तत्कालीन मंत्री वाई वी चव्हाण ने लोकपाल विधेयक पेश किया। इसे संयुक्त समिति को भेजा गया, जहां से लौटने के बाद 20 अगस्त 1969 को सदन ने इसे पारित कर दिया। इसके बाद यह राज्यसभा जाता, तभी कांग्रेस में सिंडीकेट का सवाल खड़ा हो गया और लोकसभा भंग होने के साथ यह भी चला गया। दूसरी बार इसे 2 अगस्त 1971 को तत्कालीन मंत्री रामनिवास मिर्धा ने पेश किया, लेकिन उस लोकसभा में भी यह पारित नहीं हो सका। तीसरा मौका जनता पार्टी सरकार के समय आया जबकि 23 जुलाई 1977 को तब के गृह मंत्री चौधरी चरण सिंह ने इसे विधेयक को पेश किया, लेकिन जनता पार्टी की कलह में इस पर किसी का ज्यादा ध्यान ही नहीं गया। जनता पार्टी की सरकार भी गंवानी पड़ी और लोकसभा का कार्यकाल भी पूरा नहीं हुआ। 25 अगस्त 1985 राजीव गांधी के सत्ता में आने पर कानून मंत्री अशोक कुमार सेन ने चौथी बार इस विधेयक को पेश किया। विधेयक को इस बार भी पारित नहीं हुआ। अगले आम चुनाव में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई। पांचवी बार 21 दिसंबर 1989 को वीपी सिंह सरकार के मंत्री दिनेश गोस्वामी ने इस विधेयक को पेश किया, लेकिन पहले सरकार गई और उसके बाद लोकसभा भी समय पूर्व भंग हो गई। छठा प्रयास 10 दिसंबर 1996 को हुआ। देवगौड़ा सरकार के मंत्री एसआर बालासुब्रमण्यम ने विधेयक को पेश किया, लेकिन फिर से वही इतिहास दोहराया गया। सातवीं बार वाजपेयी सरकार ने 23 जुलाई 1998 को के आर जनार्दनन ने इस विधेयक को पेश किया, लेकिन कुछ महीने बाद उनकी भी सरकार गिर गई और एक बार फिर समय पूर्व लोकसभा भंग हो गई। अगली बार सत्ता में आने पर 9 जुलाई 2001 को तत्कालीन मंत्री वसुंधरा राजे ने एक बार फिर विधेयक को पेश किया, लेकिन विधेयक उससे आगे नहीं बढ़ सका और अगले आम चुनाव में वाजपेयी सरकार भी चुनाव हार गई। अब यह नौवां मौका है जब इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया गया है।
Tuesday, August 30, 2011
सरकारों के लिए मनहूस रहा है लोकपाल बिल
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