Saturday, August 27, 2011

भ्रष्टाचार के दलदल में फंसा है देश

थलसेना प्रमुख जनरल वी के सिंह का कहना है कि देश इस समय भ्रष्टाचार के दलदल में फंसा है। हमारा ध्येय होना चाहिए कि इससे किस तरह से बाहर निकलें। उन्होंने कहा, भ्रष्टाचार रोधी आंदोलन (अन्ना के आंदोलन) को देश में जो समर्थन मिला है, वह लोकतंत्र और जनता की शक्ति का संकेत है। महत्वपूर्ण यह नहीं कि कौन इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है, बल्कि विचारणीय यह है कि यह हालात क्यों पैदा हुए। सेनाध्यक्ष वी के सिंह ने मनोरंजन उद्योग से जुड़े सदस्यों के साथ चर्चा में यह बात कही। इस कार्यक्रम का आयोजन पूर्व सांसद संतोष भरतिया ने कल रात जुहू में किया था। उन्होंने कहा, कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से सुदूर पूर्वोत्तर तक बहुत सी चीजें हो रही हैं। तमाम वजहों से देश में कुछ अशांति सी है। इसमें कुछ प्रायोजित है, कुछ वास्तविक और कुछ जो सच्ची चीजों से शुरू हुई और फिर किसी और चीज में बदल गई। उन्होंने कहा, हम एक दिलचस्प और अशांत दौर से गुजर रहे हैं। दिलचस्प इसलिए कि हम लोकतंत्र व जनता की ताकत के गवाह बन रहे हैं। दिलचस्प इसलिए कि हम देख रहे हैं कि किस प्रकार हमारा नेतृत्व इन चीजों का सामना कर रहा है। जनरल वी के सिंह ने कहा,मुख्य ध्येय केवल एक है कि किस प्रकार हम अपने देश को इस दलदल से बाहर निकालें जिसमें हम फंसे हुए हैं। इससे कोई मतलब नहीं कि इस आंदोलन का नेतृत्व कौन कर रहा है बल्कि विचारणीय बात यह है कि हालात ऐसे क्यों हुए। थल सेनाध्यक्ष ने भ्रष्टाचार की तुलना हाइड्रा जैसे सिर वाले दैत्य से करते हुए कहा, चूंकि हम सब इसमें शामिल हैं, इसलिए यह बढ़ रहा है। अगर हम गौर करें तो हम देखेंगे कि कभी न कभी हम सभी इसमें लिप्त रहे हैं। उन्होंने कहा, जब नक्सली आंदोलन का मुद्दा हमारे सामने आया था, हमारे दिमाग में यह बात स्पष्ट थी कि यह एक सामाजिक आर्थिक समस्या है, एक समस्या जो कुशासन के कारण पैदा हुई


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