नई दिल्ली भ्रष्टाचार पर छिड़ी व्यापक बहस के बीच कभी विपक्ष तो कभी सिविल सोसाइटी की ओर से लग रहे आरोपों पर प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने गुरुवार को चुप्पी तोड़ी और खुलकर बोले। भ्रष्टाचार को लेकर विपक्ष के आरोपों पर राज्यमंत्री वी.नारायण सामी के बजाए खुद मोर्चा संभाल कर न केवल विपक्ष को चौैंकाया बल्कि खुद को आहत बताया। साथ ही सार्वजनिक जीवन में अपनी लंबी पारी और साख का हवाला देते हुए विपक्ष को उनकी संपत्ति की जांच कराने की चुनौती भी दे डाली। भावनात्मक स्तर पर विपक्ष को चुप कराने के अलावा मनमोहन ने सरकार के बचे हुए ढाई साल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का भरोसा दिलाकर अपना वजन भी दिखाया। पिछले कुछ महीनों में पूर्व मंत्री ए.राजा, सुरेश कलमाड़ी समेत कुछ लोग जहां भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं, प्रधानमंत्री पर विपक्ष का निशाना बढ़ा है। खास तौर पर ए. राजा व राज्यसभा सांसद कनीमोरी के बयानों ने विपक्ष को मौका दिया। गुरुवार को लोकसभा में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हो रही चर्चा के बीच प्रधानमंत्री ने विपक्ष को चौंकाते हुए बड़ी कुशलता से इन आक्षेपों का जवाब दिया। सरकार के किसी भी सहयोगी की ओर से हुए भ्रष्टाचार की अनदेखी से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि 41 साल के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने ईमानदारी की कोशिश की। 20 साल से वह संसद में हैं और इस दौरान कभी वित्तमंत्री तो सात साल से बतौर प्रधानमंत्री उन्होंने देश को आगे बढ़ाने की कोशिश की है। फिर भी ऐसा चित्रण करने की कोशिश होती है जैसे मैं भ्रष्टाचार का स्रोत हूं। थोड़ा भावनात्मक होते हुए उन्होंने कहा इस तरह के आरोपों से दर्द होता है। उन्होंने चुनौती दी कि विपक्ष चाहे तो इस दौरान उनके द्वारा अर्जित संपत्ति की जांच करा ले।
Saturday, August 27, 2011
आरोपों से आहत पीएम ने दी सफाई
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