Tuesday, August 30, 2011

शीला से इस्तीफे की मांग पर हंगामा

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा का मानसून सत्र पहले ही दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। राष्ट्रमंडल खेलों की योजनाओं में घपले को आधार बनाकर भाजपा सदस्यों ने जबरदस्त हंगामा किया तथा मुख्यमंत्री से इस्तीफा की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष के बार-बार कहने पर भी जब भाजपा सदस्य नहीं माने तो उन्होंने दिन भर के लिए विधानसभा स्थगित कर दी। दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र का सोमवार को पहला दिन था। दोपहर दो बजे विधानसभा सत्र शुरू हुआ। विधानसभा अध्यक्ष डा. योगानंद शास्त्री ने अन्ना हजारे द्वारा अनशन समाप्त करने पर प्रस्ताव पढ़ा। उन्होंने कहा कि यह सदन सभी तरह के भ्रष्टाचार के खिलाफ है। साथ ही भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लेता है। इसके बाद सदन ने महानगर परिषद के सदस्य बृजमोहन तूफान व सतीश सक्सेना की मृत्यु पर शोक शोक संवेदना व्यक्त की। प्रश्नकाल शुरू होता इससे पहले ही नेता प्रतिपक्ष वी के मल्होत्रा ने शुंगलू कमेटी और सीएजी रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए प्रस्ताव लाने की मांग की। अध्यक्ष ने अनुमति नहीं दी। भाजपा सदस्य डा. हर्षवर्धन, कर्ण सिंह तंवर, रमेश विधूड़ी, नरेश गौड़ आदि अपनी सीटों से खड़े हो गए और शुंगलू कमेटी व सीएजी रिपोर्ट वाले पर्चे लहरा कर हंगामा करने लगे। 2 बजकर 20 मिनट तक यह सब चलता रहा। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने खड़े होकर कुछ बोलना शुरू किया। मगर शोर-शराबे में कुछ सुनाई नहीं दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने 15 मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी। ऊर्जा मंत्री हारून यूसुफ मुख्यमंत्री के पास गए। दोबारा कार्यवाही 2 बजकर 35 मिनट पर जब शुरू हुई तो भाजपा सदस्यों ने फिर से हंगामा शुरू कर दिया। भाजपा सदस्य मुख्यमंत्री के खिलाफ नारे लगाने लगे और विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी के सामने आ गए। यह सब चल रहा था तो मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अपनी सीट पर बैठी शांत भाव से उनकी ओर देख रही थीं। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने फिर से भाजपा सदस्यों से सदन चलने देने के लिए कहा। मगर उन्होंने नहीं सुना तो उन्होंने आधा घंटे के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी। आधे घंटे बाद कार्यवाही फिर शुरू हुई तो फिर से भाजपा सदस्यों ने हंगामा किया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी।


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