निलंबित होने के बाद भी वर्दी पहनकर अन्ना हजारे के मंच पर यूपी पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ आग उगलने वाले सिपाही सुबोध यादव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी। एडीजी कानून-व्यवस्था एपी माहेश्र्वरी का कहना है निलंबित सिपाही को वर्दी पहनने का अधिकार नहीं है। उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सुबोध का कहना है कि भ्रष्टाचार और जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने पर उसे अब तक नौ बार निलंबित किया जा चुका है। अब उसे किसी कार्रवाई का भय नहीं है। राजकीय रेलवे पुलिस गोरखपुर में तैनाती के दौरान सुबोध यादव को निलंबित कर दिया गया। सुबोध यादव पर कल्याण संस्थान के पदाधिकारी के रूप में अनुशासन तोड़ने का आरोप है। 1994 में सुबोध देहरादून से पुलिस में भर्ती हुआ और इसी वर्ष 20 जनवरी को इटावा जीआरपी से उसका गोरखपुर के लिए तबादला हुआ था। बुधवार को सुबोध उस समय अचानक सुर्खियों में आ गया, जब वह दिल्ली के रामलीला मैदान पर अन्ना के मंच पर पहंुचा। इस संदर्भ में एडीजी कानून-व्यवस्था एपी माहेश्र्वरी ने कहा कि सिपाही के आरोप-प्रत्यारोप को जाने बिना कोई टिप्पणी करना संभव नहीं है, लेकिन निलंबित होने के बावजूद वर्दी पहनना अपराध है। उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक अब सुबोध यादव की बर्खास्तगी की भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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