ग्रुप (ए) और उससे ऊपर के अधिकारियों को लोकपाल में शामिल किया जाए और उनके खिलाफ जांच केंद्रीय सतर्कता आयोग करे। जनलोकपाल बिल से इतर इसमें सिर्फ ग्रुप (ए) और उससे ऊपर के अधिकारियों को लोकपाल में शामिल करने की बात कही गई है। जनलोकपाल बिल में सभी सरकारी अधिकारियों जो जनसेवक के दायरे में आते हैं, लोकपाल के दायरे में लाए जाने की सिफारिश है। लोकपाल के पास जांच और मामला चलाने के लिए अलग टीम हो। सुप्रीम कोर्ट में शिकायत के बाद लोकपाल के खिलाफ जांच की जाए और फिर कोर्ट लोकपाल को बर्खास्त करने की सिफारिश राष्ट्रपति से करे। लोकपाल सरकार के प्रति जवाबदेह हो। लोकायुक्त या लोकपाल को हटाने की शक्ति सरकार के पास हो। लोकपाल के पास जांच और मामला चलाने के लिए अलग टीम हो। लोकपाल के पास जांच और मामला चलाने के लिए अलग टीम होंगी। लोकपाल की जवाबदेही जनता के प्रति होगी। आम जनता लोकपाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शिकायत करे और उन्हें हटाने की मांग कर सकती है। लोकपाल को हटाने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति को होगा। इस मसौदे के तहत राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति हो और उन्हें भी केंद्र के लोकपाल के बराबर की शक्तियां दी जाएं। सिर्फ केंद्र में लोकपाल बने। राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र के लोकपाल या जनलोकपाल विधेयक के जरिए लोकायुक्त बनाने पर आपत्ति की है। जनलोकपाल विधेयक के तहत ही राष्ट्रीय स्तर पर लोकपाल बने और इसी आधार पर लोकायुक्तों की राज्यों में नियुक्ति हो। जनलोकपाल बिल से इतर इसमें न्यायपालिका को न्यायपालिका लोकपाल (ज्यूडिशियल एकाउंटेबिलिटी कमीशन) में शामिल करने की बात कही गई है। मूल रूप से ज्यूडिशियल एकाउंटेबिलिटी बिल को मजबूत करने की वकालत की गई है। न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में न रखा जाए बल्कि उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उन्हें ज्यूडिशियल एकाउंटेबिलिटी बिल में शामिल किया जाए। इसके तहत तीन सदस्यीय समिति जांच करे और एफआइआर दायर करने की अनुमति दे। न्यायपालिका को भी लोकपाल में शामिल किया जाए। सात सदस्यीय लोकपाल की बेंच शिकायत सुने। प्रथम दृष्टया सबूत मिलने पर एफआइआर की अनुमति दे। पुलिस या सीबीआइ जांच करे। अगर मामला बनता हो तो सजा दी जाए। जन लोकपाल बिल और सरकारी लोकपाल बिल की तरह इसमें सांसदों को शामिल करने की बात कही गई है पर जांच प्रक्रिया के बारे में मसौदे में स्पष्ट जानकारी नहीं है। जन लोकपाल बिल की तरह ही इसमें भी सांसदों को शामिल करने की वकालत की गई है। पर इसमें सांसदों के खिलाफ आरोपों की जांच संसद से कराने की बात है। सभी सांसदों को शामिल किया जाए। संसद में रिश्वत और संसद में उनके बोलने के मामलों में अगर भ्रष्टाचार का मामला बनता हो तो इसकी शिकायत सात सदस्यीय लोकपाल बेंच से हो। प्रधानमंत्री के खिलाफ तब तक जांच न की जाए जब तक लोकपाल की पूरी बेंच भारत के मुख्य न्यायाधीश को सिफारिश न करे। फिर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में पूर्ण खंडपीठ शिकायत की जांच करे और आगे जांच के बारे में फैसला करे। जन लोकपाल बिल से इतर इसमें प्रधानमंत्री को बिल में शामिल नहींकिया गया है। पद छोड़ने के बाद प्रधानमंत्री को लोकपाल में शामिल करने की बात है। इसमें सात वर्ष का समय दिया गया है ताकि पूर्व प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल भी इसमें आ सके। प्रधानमंत्री को शामिल किया जाए। भ्रष्टाचार की शिकायत सात सदस्यों वाली लोकपाल की पीठ सुने। प्रथम दृष्टया सबूत पर्याप्त पाए जाने पर लोकपाल इस मामले की जांच करे। प्रथम दृष्टया सबूत न होने पर शिकायत खारिज हो और शिकायत करने वाले को सजा दी जाए। एनसीपीआरआइ सरकारी लोकपाल बिल जनलोकपाल बिल लोकपाल के अधिकार लोकपाल की नियुक्ति नौकरशाही न्यायपालिकासांसद प्रधानमंत्री

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