नई दिल्ली लोकपाल गतिरोध पर सरकार का सुलह फार्मूला संसदीय समिति के दायरे से आगे नहीं बढ़ा है। अन्ना के अनशन को तुड़वाने में पहल का दरवाजा खोलने के साथ सरकार ने प्रधानमंत्री के स्तर से स्पष्ट किया है कि समझौते का सफर संसदीय प्रक्रिया और मर्यादा के रास्ते ही तय होगा। ऐसे में टीम अन्ना को लोकपाल विधेयक की शक्ल तय करने के लिए हर हाल में संसदीय समिति पर ही भरोसा करना होगा। हालांकि, अन्ना हजारे के अनशन के आठवें दिन लिखी चिट्ठी में प्रधानमंत्री ने यह भरोसा दिलाने का प्रयास जरूर किया कि संसदीय समिति जन लोकपाल को भी बराबर तवज्जो देगी। संसदीय समिति को लेकर टीम अन्ना के सवालों का जवाब देते हुए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि लोकपाल विधेयक पर विचार कर रही समिति के आगे सभी विकल्प खुले हैं। इसमें शक नहीं होना चाहिए कि समिति सरकार की ओर से पेश विधेयक के साथ ही जन लोकपाल व अन्य प्रारूपों के भी सभी पहलुओं और विकल्पों पर विचार करेगी। बल्कि, उसके पास विधेयक में हर प्रकार के बदलाव का अधिकार भी है। लिहाजा ऐसे में जन लोकपाल सरकार की ओर से पेश न करने का प्रश्न अप्रासंगिक है। सरकार की ओर से संसद के सामने जन लोकपाल विधेयक न रखे जाने को मुद्दा बना रही टीम अन्ना के आगे अपनी नई पहल दिखाते हुए सरकार ने इसे लोकसभा अध्यक्ष की ओर से संसदीय समिति को भेजे जाने का भी प्रस्ताव दिया है। साथ ही प्रधानमंत्री ने सरकार की ओर से औपचारिक तौर पर लोकपाल विधेयक पर मंत्रणा यथाशीघ्र पूरा करने का भी आग्रह करने की बात कही है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने अन्ना को पत्र लिखने के पहले लोकपाल विधेयक पर विचार कर रही विधि मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी के साथ करीब डेढ़ घंटे तक विचार विमर्श किया। सूत्रों के मुताबिक संसदीय समिति ने लोकपाल पर मंथन के लिए कम से कम आठ हफ्तों का समय मांगा है। समिति से जुड़े सूत्रों की दलील है कि आम तौर पर 90 दिन का समय जरूरी प्रक्रिया के लिए आवश्यक है और इसे फास्ट ट्रैक करने के लिए भी 56 दिन का वक्त तो लगेगा ही। ऐसे में सरकार के साथ समझौते की राह में 30 अगस्त तक जन लोकपाल विधेयक पारित करने की समय-सीमा बांध चुकी टीम अन्ना को सबसे पहले इस मामले पर नरमी दिखानी होगी। अन्ना को लिखे पत्र में प्रधानमंत्री ने कहा है कि सरकार संवैधानिक रूप से वैध और श्रेष्ठतम संभव लोकपाल विधेयक पारित करने को लेकर प्रतिबद्ध है जिसमें सिविल सोसाइटी की राय और व्यापक सर्वानुमति को समाहित किया जा सके। पीएम ने अपनी पाती में टीम अन्ना के जन लोकपाल ही नहीं, अरुणा राय की ओर से रखे मसौदे समेत इस मुद्दे पर उठे सभी मतों को समाहित करने की भी बात कही है।

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