: उच्च न्यायपालिका को जवाबदेह बनाने के मकसद से प्रस्तावित विधेयक का अध्ययन करने वाली संसदीय समिति ने वरिष्ठ न्यायाधीशों के खिलाफ आरोपों में जांच के लिए बनाई जाने वाली समिति में संसद के दो सदस्यों को शामिल करने की सिफारिश की है। समिति की यह रिपोर्ट मंगलवार को संसद में पेश किए जाने की उम्मीद है। कानून और न्याय मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने न्यायिक मानक तथा जवाबदेही विधेयक, 2010 पर सिफारिशों को अंतिम रूप दे दिया है। समिति ने वरिष्ठ जजों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए प्रस्तावित राष्ट्रीय न्यायिक निगरानी समिति में दो गैर न्यायिक सदस्यों को शामिल करने का सुझाव दिया है। समझा जाता है कि समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि राष्ट्रीय न्यायिक निगरानी समिति में लोकसभा और राज्यसभा से एक-एक सदस्य को शामिल किया जाए। विधेयक के तहत भारत के किसी पूर्व प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय निगरानी समिति मेंच्उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश, किसीच्उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति तथा भारत के अटार्नी जनरल भी शामिल होंगे। गौरतलब है कि कलकत्तच् उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सौमित्र सेन के खिलाफ राज्यसभा में महाभियोग की कार्यवाही के दौरान अनेक सदस्यों ने न्यायपालिका की जवाबदेही की भी बात उठाई थी। समिति ने न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों का अध्ययन करने और उन्हें गुण-दोष के आधार पर निगरानी समिति को बढ़ाने के लिए गठित होने वाली छानबीन समितियों में गैर न्यायिक सदस्यों को शामिल करने की जरूरत बताई हच्। उच्चतम न्यायालय और सभी च्1 उच्च न्यायालयों में छानबीन समिति होगी जो तीन महीने के भीतर रिपोर्ट निगरानी समिति को सौंपेंगी। समिति ने न्यायाधीशों के खिलाफ अपुष्ट शिकायतें करने के दोषी लोगों की सजा और उन पर जुर्माना भी कम करने की सिफारिश की है।

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