नई दिल्ली चेहरे पर खुशी, दिल में सुकून, कइयों की आंखों से छलकते आंसू, एक-दूसरे को बधाई देते लोग और बहुत कुछ.. यह देखने को मिल रहा था रामलीला मैदान में। सड़कों पर चल रहे, बसों-मेट्रो से सफर कर रहे लोगों के चेहरों से। भ्रष्टाचार के खिलाफ आधी जीत जो हुई है। दोनों सदनों (राज्य सभा व लोकसभा) ने जन लोकपाल बिल के उस प्रस्ताव को पास कर दिया है जिसके लिए अन्ना हजारे पिछले 12 दिनों से रामलीला मैदान में अनशन पर हैं। जिनके समर्थन में लाखों-करोड़ों लोग अब तक सड़क पर निकल चुके हैं। असली जश्न मनाने की बात तो अन्ना हजारे ने आज (रविवार) को कही है लेकिन शुरुआत तो हो चुकी है। याहू.. यह जनता का नारा है, अब तो तंत्र हमारा है, भारत माता की जय बोल, तब दिल के दरवाजे खोल। जैसे नारों से पूरा रामलीला मैदान गूंज रहा था। रात करीब सवा नौ बजे केंद्रीय मंत्री विलास राव देशमुख प्रधानमंत्री का पत्र रामलीला मैदान के मंच पर से पढ़ रहे थे तो उपस्थित लोग ध्यान से सुन रहे थे। जब उन्होंने कहा कि दोनों सदनों ने प्रस्ताव पास किया तो खुशी की ध्वनि मैदान में गूंजी ..अन्ना हजारे की जय, इंकलाब जिंदाबाद, वंदे-मारतम जैसे शब्द सुनने को मिले। जो लोगों के बदन में एक अजीब तरह की सिहरन पैदा कर रहे थे। कुछ देर के लिए देशमुख को शांत रहना पड़ा। लोगों का अनुशासन तो देखिए जब राष्ट्रगान जन गण मन शुरू हुआ तो वहां उपस्थित लोग सावधान की मुद्रा में खड़े हो गए। अलग-अलग जगहों से सूचना मिलती रही कि लोग टीवी देखने के दौरान राष्ट्रीय गीत पर खड़े होकर एक तरह से राष्ट्र को सलामी दे रहे थे। मंच से टीम अन्ना के सदस्य ने लोगों से निवेदन किया था कि यदि आप टीवी देख रहे हैं तो भी खड़े हो जाएं राष्ट्रगान के दौरान। ..और मंच से जब अन्ना हजारे ने लोगों को संबोधित करना शुरू किया तो एकटक लोग उन्हें देख रहे थे। उनके चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रहे थे। उनके चेहरे की चमक यह बता रही थी कि इस दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं। जरूरत है आत्मबल की। हां, उन्होंने अपने उपवास करने के तरीकों के बारे में जरूर बताया और मंच से ही लालू प्रसाद यादव के उस सवाल का जवाब भी दिया जिसमें उन्होंने 12 दिनों तक उपवास करने का तरीका जानना चाहा था। हालांकि अन्ना ने नाम तो किसी का नहीं लिया लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि 10-12 बच्चे पैदा करने के बाद 10-12 दिन का उपवास तो नहीं किया जा सकता। इसके लिए ब्रह्मचर्य की जरूरत होती है। बातें तो उन्होंने बहुत कही जिन्हें लोगों ने ध्यानपूर्वक सुना और शायद अपनी दिनचर्या में भी उतारेंगे क्योंकि अन्ना का 12 दिन का साथ जो उन्हें मिला है। पुलिस भी थी नतमस्तक : अन्ना आंदोलन में समर्थकों की गांधीगीरी का तोड़ पुलिस के पास सिवाय संयम और गांधीगीरी के कुछ नहीं था। 16 अगस्त को अन्ना की गिरफ्तारी के बाद सड़कों पर उतरे जन-आक्रोश और अन्ना द्वारा समर्थकों से यह अपील कि अंहिसापूर्वक आंदोलन जारी रखना है, सरकार और पुलिस चाहे कितना भी जुल्म करे सबकुछ सहना है। यही अपील दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के दिल को भी छू गई और उन्हें समर्थकों के विरोध की काट मिल गई। तीन दिन तिहाड़ में रहने के दौरान अन्ना की अपील का समर्थकों पर जादू सा असर देख, पुलिस ने भी यह निर्णय लिया कि उन्हें भी गांधीगीरी करनी है। पुलिस कर्मियों को यह निर्देश जारी किए गए कि आपको डंडा नहीं उठाना, केवल गांधीगीरी और संयम से काम लेना है। इसका असर यह हुआ कि राजधानी ही नहीं देशभर में दिल्ली पुलिस के संयम और व्यवहार को सराहा जा रहा है। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत बताते हैं कि देश की जन भावना जब सड़कों पर उतरी तो उसे देश ही नहीं पूरा विश्व देख रहा था। अन्ना के समर्थक न तो सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे और न ही यातायात जाम कर रहे थे। वह सड़क के एक ओर चलते हुए अपना विरोध दर्शा रहे थे। हम भी यह समझ चुके थे कि सड़कों पर उतरी भीड़ को डंडे से नहीं गांधीगीरी से ही नियंत्रित किया जा सकता था। इसलिए निर्देश जारी किए गए कि कहीं कोई लाठीचार्ज नहीं होगा। कुछ हुडदंगियों ने पुलिस के संयम को कसौटी पर भी आजमाया। लेकिन पुलिस कर्मियों ने उनके प्रति नरमी बरती और कानून का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई भी की।

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