नई दिल्ली अन्ना हजारे के दस दिन के अनशन और सख्त तेवरों ने सरकार को जनलोकपाल बिल के साथ-साथ उससे संबंधित अन्ना के तीन महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी संसद में विचार करने के लिए विवश कर दिया। सरकार शुक्रवार को संसद में जन लोकपाल पर चर्चा के लिए तैयार हो गई है। वह इस चर्चा के दौरान अन्ना की तीन शर्तो पर बहस कराने का लिखित भरोसा देने जा रही है। इस लिखित भरोसे के बाद ही अन्ना अनशन तोड़ने को राजी होंगे। चूंकि अन्ना ने कहा है कि वह तीन शर्तो पर संसद की सहमति के बाद ही अनशन तोड़ेंगे इसलिए नतीजा निकलने में समय भी लग सकता है। इसकी पुष्टि कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने यह कहकर की कि अंतिम रास्ता निकलने में थोड़ा वक्त लग सकता है। अन्ना और सरकार के बीच चल रही बातचीत जहां बुधवार को टूट के कगार पर पहुंच गई थी, वहीं गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दखल के साथ ही यह न सिर्फ पटरी पर आई, बल्कि अंजाम के बिल्कुल करीब तक पहुंचती दिखी। इस बार प्रधानमंत्री ने अपना दूत चुना अन्ना के गृह राज्य महाराष्ट्र के अपने कैबिनेट सहयोगी विलासराव देशमुख को। पहले प्रधानमंत्री ने संसद में यह वादा किया कि सरकार जन लोकपाल बिल सहित लोकपाल के तीनों मसौदों पर चर्चा के लिए तैयार है। इस वादे पर नेता विपक्ष ने भी मुहर लगाई और इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने भरे सदन में अपनी सीट से खड़े होकर अन्ना से अनशन तोड़ने की अपील की। प्रधानमंत्री की पहल पर देशमुख अन्ना को मनाने रामलीला मैदान पहुंच गए। उन्होंने अन्ना से मिल कर प्रधानमंत्री और सरकार की ईमानदार मंशा के बारे में उन्हें आश्वस्त करने की कोशिश की, मगर तीन बातें अब भी थीं, जिनके पूरा हुए बिना अन्ना कोई वादा नहीं करना चाहते थे। अन्ना ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख कर कहा कि मेरे साथ देश भर में इतने लोग इस उम्मीद से जुड़े हैं कि उन्हें भ्रष्टाचार से निजात मिलेगी। इसके लिए जरूरी है कि राज्यों में भी लोकायुक्त के गठन के लिए कानून पास हो। आम लोगों को रोजाना जिन अधिकारियों के भ्रष्टाचार से दो-चार होना पड़ता है उनसे लड़ने की व्यवस्था हो। इसी तरह सभी सरकारी सेवाओं के लिए समय सीमा तय हो और उन्हें समय पर पूरा नहीं करने वाले अधिकारी पर जुर्माना लगे। अन्ना की यह चिट्ठी लेकर देशमुख दोबारा पीएम के पास पहुंचे। उन्होंने अन्ना की शर्तो पर प्रणब और एंटनी से चर्चा कर तय किया कि इन शर्तो को मान लेने में कोई बुराई नहीं है। जल्दी ही सरकार की ओर से यह लिखित आश्वासन अन्ना को दे दिए जाने की उम्मीद है। सलमान खुर्शीद ने बताया कि प्रधानमंत्री के बयान के आधार पर काम हो रहा है। लोकसभा में शुक्रवार को जन लोकपाल पर बहस होगी। सरकारी पक्ष की तरफ से यह नहीं बताया गया है कि प्रस्ताव का मजमून क्या होगा और क्या उस पर मतदान कराया जाएगा? (पेज-2, 3 और 4 भी देखें)
Saturday, August 27, 2011
जनलोकपाल पर संसद में चर्चा आज
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