नई दिल्ली पूरे देश के सांसद अन्ना के जन लोकपाल का अपने दलों के अंदर भले ही विरोध कर रहे हों, लेकिन महाराष्ट्र के सांसदों ने अन्ना के सामने घुटने टेक दिए हैं। दूसरे दलों के सांसद भी विरोध की मंशा रखने के बावजूद जनता के दबाव में मुंह खोलने से कतरा रहे हैं। अन्ना के खौफ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महाराष्ट्र से ताल्लुक रखने वाले केंद्र सरकार के एक मंत्री ने दो टूक कहा कि इस मौके पर अन्ना का विरोध करने का दुस्साहस शायद ही कोई करेगा। जाना जा सकता है कि अन्ना का आंदोलन शुरू होने के बाद से संप्रग का प्रभावी घटक होने के बावजूद राकांपा ने चुप्पी साध रखी है। जबकि राकांपा प्रमुख शरद पवार ने तो भ्रष्टाचार से निपटने के लिए बने मंत्री समूह से खुद को बहुत पहले ही अलग कर लिया था। इतना ही नहीं, कांग्रेस के दत्तामेघे ने तो अन्ना के खिलाफ अपशब्द कहने वाले अपनी ही पार्टी के मनीष तिवारी से माफी मांगने की बात कह दी है। कांग्रेस सांसद प्रिया दत्त भी सरकारी लोकपाल को कमजोर ठहरा चुकी हैं। लोकसभा में अन्ना के लोकपाल की आलोचना कर चुके कांग्रेस के ही संजय निरूपम भी मंगलवार को अन्ना टोपी पहने नजर आए। जबकि उनकी पार्टी शुरू से जन लोकपाल के विरोध में मोर्चा खोले रही है और उस बहस में वे भी खूब बढ़-चढ़कर भाग ले रहे थे। आलम यह है कि केंद्रीय मंत्री तक अन्ना की आंधी से घबराने लगे हैं। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा का चुनाव है। प्रदेश से आने वाले एक केंद्रीय मंत्री ने कहा राहुल ने बीते महीनों में यूपी में जो कुछ बोया था वह अन्ना की बाढ़ में बह गया। चुनाव पर असर पड़ना तय है। ध्यान रहे कि अगले साल यूपी समेत पांच राज्यों में चुनाव होने हैं। उधर, जन लोकपाल के समर्थन के लिए अन्ना की तरफ से सांसदों के क्षेत्र में घेराव के एलान के बाद सभी दलों में बेचैनी है। जिस तरह मतदाताओं ने अलग-अलग दलों के कुछ सांसदों की घेरेबंदी की उससे दूसरे सांसदों की भी सांस फूल रही है कि न जाने उनका नंबर कब आ जाए। हालांकि, अंदरखाने अन्ना के इस आह्वान से सभी दलों के सांसद खासे नाराज भी हैं। दैनिक जागरण, राष्ट्रीय संस्करण, 24-08-2011
दैनिक जागरण, राष्ट्रीय संस्करण, 24-08-2011

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