राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पूर्व निजी सचिव और स्वतंत्रता सेनानी वेंकट कल्याणम का कहना है कि समाजसेवी अन्ना हजारे ऐसे लोगों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं जो चरित्रहीन हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी अत्याचार से लड़ना आसान था लेकिन भारतीय भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ना आसान नहीं, क्योंकि हमने गांधीजी ने अंगे्रजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी जो चरित्रवान थे। अत: भ्रष्टाचार आंदोलन को लेकर अन्ना गांधीजी से आगे निकल गए हैं। चेन्नई निवासी 90 वर्षीय वेंकट ने कहा, कि आजादी के 64 साल बीत जाने के बाद भी लोगों ने सिर्फ भ्रष्टाचार से निपटने की बात की है। अपने राजनेताओं की तरफ देखिए, वह कैसे संसद की गरिमा को तार-तार करते हैं। अन्ना ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार को सीधी चुनौती पेश की है। वह इसे हमारे बच्चों और देश के भविष्य के लिए कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार की समस्या सिंतबर, 1947 में भी थी। गांधीजी को प्रतिदिन करीब 80 लोगों के पत्र आते थे जिसमें भ्रष्ट राजनेताओं की शिकायत की जाती थी। भ्रष्टाचार तो अंग्रेजों के शासनकाल में भी था, लेकिन इस हद तक नहीं। वेंकट ने कहा, समस्या यह है कि देश के किसी भी प्रधानमंत्री ने इस समस्या से निपटने की कोशिश नहीं की। यहां तक कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भी नहीं।पुरानी यादों को ताजा करते हुए उन्होंने कहा, मुझे याद है एक बार एक संसद सदस्य ने नेहरू से सवाल किया था कि भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने के लिए वह क्या कर रहे हैं? नेहरू ने जवाब दिया, माननीयों को इसकी शिकायत नहीं करनी चाहिए।

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