Thursday, August 25, 2011

सांसद चाहते हैं संसद की सर्वोच्चता

नई दिल्ली भ्रष्टाचार से निपटने के लिए लोकपाल के गठन और अन्ना के आंदोलन पर शुरू हुई बहस की जद में अब संसद की गरिमा व सर्वोच्चता बचाने का सवाल भी आ गया है। प्रधानमंत्री से लेकर सांसदों तक को संसद की सर्वोच्चता को हर हाल में बनाए रखने का चिंता मथने लगी है। सभी चाहते हैं संसद ही सबसे ऊपर रहे। यही वजह है कि भ्रष्टाचार से निपटने के लिए मजबूत लोकपाल की पैरवी तो सभी सांसदों ने की, लेकिन साथ ही कहा कि कुछ भी ऐसा नहीं होना चाहिए, जिससे संसद की गरिमा पर कोई आंच आए। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर संसद के दोनों सदनों तक में बुधवार को इस मसले पर सदस्यों ने अपनी चिंता जाहिर की। लोकपाल, जन लोकपाल और उसको लेकर समाजसेवी अन्ना हजारे के आंदोलन के चलते पैदा हुई परिस्थितियों को लेकर हुई सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल की घटनाओं से हमारे संसदीय प्रजातंत्र के कामकाज पर फिर सवाल उठ खड़े हुए हैं। उससे हम सभी चिंतित हैं। इससे पहले भ्रष्टाचार के मामले पर हुई अल्पकालिक चर्चा में संसद की सर्वोच्चता व गरिमा को लेकर सांसदों की चिंता साफ दिखी। कांग्रेस के केएस राव ने तो यहां तक कह दिया, क्या हम इस बात से सहमत हैं कि हमें (संसद) सिविल सोसाइटी (टीम अन्ना) निर्देशित करे। जदयू के शरद यादव ने कहा कि जो भी लोकपाल बने, वह संवैधानिक दायरे में ही होना चाहिए। जदयू के ही राजीव रंजन सिंह लल्लन ने कहा कि हर हाल में संसद को अक्षुण्ण रखना होगा। कांग्रेस के भक्तचरण दास ने कहा कि सभी को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर संसद की सर्वोच्चता बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। इस मसले पर राज्यसभा में नेता विपक्ष अरुण जेटली ने कहा कि समाज सेवी अन्ना हजारे के आंदोलन से बनी परिस्थितियों में देश भर से संसद व सरकार को अपने दायित्व निभाने का सीधा संदेश मिल रहा है। प्रजातांत्रिक संस्थाएं अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही हैं। गंभीरता से विचार करने की जरूरत है कि हमसे गलती कहां हुई। निर्दलीय सांसद मो. अदीब ने कहा कि एक तय समय में लोकपाल कानून बनाने की जिद संसदीय लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं है। एक अन्य निर्दलीय राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों के गुस्से पर सांसदों को जवाब देना चाहिए।

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