वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री को इसके दायरे में लाया जाता है तो केंद्र में अस्थिरता की स्थिति पैदा होगी। गौरतलब है कि केंद्रीय कैबिनेट ने दो दिन पहले ही लोकपाल विधेयक को मंजूरी दी है जिसमें प्रधानमंत्री को इसके दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव है। टीम अन्ना ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। मुखर्जी ने एजेंसी से साक्षात्कार में कहा, उत्तेजनापूर्ण माहौल में कोई भी लोकपाल को लिख सकता है और शिकायत कर सकता है। अगर लोकपाल को प्रथम दृष्ट्या उसमें आधार दिखता है। प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना होगा। मुखर्जी के अनुसार प्रधानमंत्री अपनी व्यवस्था में प्रमुख स्तंभ है और अगर वह इस्तीफा देते हैं, तो पूरी सरकार चली जाएगी। इस प्रकार आप स्थायी अस्थिरता को संस्थागत रूप दे देंगे। उन्होंने कहा कि 1996 से 1999 के बीच जब तीन साल के दौरान तीन बार आम चुनाव हुए तो भाजपा लोकसभा का कार्यकाल निर्धारित किए जाने के पक्ष में थी ताकि उसे समय से पहले भंग नहीं किया जा सके। प्रधानमंत्री, न्यायपालिका और संसद में सांसदों के आचरण को विधेयक के दायरे से बाहर रखे जाने के विरोध में 16 अगस्त से बेमियादी अनशन की हजारे की धमकी के बारे में प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अगर गांधीवादी महसूस करते हैं कि नागरिक समाज का विधेयक सर्वश्रेष्ठ है तो उन्हें समर्थन करने वाले राजनीतिक दलों को इसे बिना चर्चा संसद में पारित कराने के लिए समझाने का प्रयास करना चाहिए।
Monday, August 1, 2011
पीएम लोकपाल दायरे में आए तो बढे़गी अस्थिरता
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