Tuesday, August 2, 2011

जानबूझकर गड़बड़ी पर पीएमओ की सफाई

नई दिल्ली संसद के मानसून सत्र में 2जी स्पेक्ट्रम के मुद्दे पर विपक्ष के आक्रामक रुख को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गड़बडि़यों को जानबूझकर नजरअंदाज किया था। पीएमओ ने कहा है कि दूरसंचार विभाग को अनौपचारिक तौर पर मौजूदा आपरेटरों और नए आपरेटरों को समान मौका देने के लिए सूचित कर दिया गया था। पीएमओ ने 23 जनवरी 2008 को दूरसंचार विभाग को भेजे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा है कि यह किसी भी तरीके से लाइसेंस देने के तरीके या स्पेक्ट्रम के लिए शुल्क से संबंधित नहीं था। उसमें यह भी कहा गया है कि जिस मुद्दे की जांच की जा रही है, उस पर विचार किए बिना इस नोटिंग से गैर जरूरी नतीजे निकाले गए हैं। पीएमओ ने कहा है कि खासतौर पर ऐसी धारणा बनाने की कोशिश की जा रही है कि प्रधानमंत्री को इसकी जानकारी थी, जो अनुचित है। उल्लेखनीय है कि 23 जनवरी, 2008 की नोटिंग में कहा गया है कि प्रधानमंत्री चाहते हैं कि इसे अनौपचारिक तौर पर (दूरसंचार) विभाग के साथ साझा किया जाए। वह औपचारिक पत्र व्यवहार नहीं चाहते हैं और चाहते हैं कि पीएमओ को इससे दूर रखा जाए। अपनी सफाई में पीएमओ ने कहा कि यह नोटिंग स्पेक्ट्रम के न्यूनतम स्तर को निर्धारित करने के प्रस्ताव वाले नोट पर थी, जिसमें उस पर विचार करने को कहा गया था। पीएमओ के बयान में कहा गया है कि नए ऑपरेटरों को सामान्य शुल्क की अदायगी पर न्यूनतम स्तर तक स्पेक्ट्रम का आवंटन किया जा सकता है।


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