नई दिल्ली संसद में भ्रष्टाचार पर बहस और सर्वदलीय बैठक के बाद टीम अन्ना के और सरकार के बीच हुई बातचीत फिर वहीं पहुंच गई जहां से शुरू हुई थी। बुधवार रात की बातचीत के दौरान सरकार ने साफ कर दिया कि अब तक अन्ना की किसी शर्त को माना नहीं गया है। इसी के साथ वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने बिना कोई आश्वासन दिए अन्ना से अपना अनशन तोड़ देने का अनुरोध भी दोहराया और अरविंद केजरीवाल के अनुसार, उन्होंने यहां तक कह दिया कि उनका अनशन आपकी समस्या है। देर रात प्रणब मुखर्जी ने इस बात का खंडन किया और अन्ना के अनशन को राष्ट्रीय मु द्दा बताया। प्रणब मुखर्जी, सलमान खुर्शीद और कांग्रेस सांसद संदीप दीक्षित की टीम अन्ना के साथ बातचीत करीब डेढ़ घंटे चली। जब बैठक खत्म हुई तो अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण और किरण बेदी के चेहरे लटके थे। प्रशांत भूषण ने कहा, हम वहीं आ खड़े हुए हैं जहां परसों थे। कल जिन मुद्दों पर लग रहा था कि सरकार सहमत है वे भी पीछे छूट गए। केजरीवाल ने कहा, हमने जब उनसे पूछा कि अन्ना को लौट कर क्या जवाब दें तो उन्होंने कहा कि यह आप जानें। रामलीला मैदान पहुंचकर इन तीनों ने अपनी निराशा जताई और साथ ही अन्ना को उठा लेने की आशंका भी। देर रात मैदान की गतिविधियों से यह संकेत मिले कि सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रही है। टीम अन्ना से बैठक के बाद प्रणब मुखर्जी ने कहा, हमने अन्ना के सहयोगियों को सर्वदलीय बैठक और उनकी कल की मांग के बारे में बताया। हमें उम्मीद है कि संसदीय प्रक्रिया को पूरा होने दिया जाएगा। उन्होंने जन लोकपाल की मांग पर सिर्फ इतना ही कहा कि लोकपाल के मामले में व्यापक राष्ट्रीय सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी। हालांकि सरकार ने टीम अन्ना से यह अवश्य कहा कि कि वह नया लोकपाल बिल ड्राफ्ट करेगी और वे चाहें तो उसमें अपने सुझाव शामिल करा सकते हैं, लेकिन सर्वदलीय बैठक में की गई सभी दलों की मांग को देखते हुए अन्ना को अपना अनशन तुरंत तोड़ देना चाहिए। इससे पहले प्रधानमंत्री ने शाम को अपने आवास पर रोजा इफ्तार की दावत में इस मसले का जल्द हल निकलने की उम्मीद जताई। इफ्तार से ठीक पहले प्रधानमंत्री आवास पर हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार कोई राजनीतिक सहमति बनाने में नाकाम रही। सभी दल अन्ना हजारे से अनशन तोड़ने की अपील तक सीमित रहे। विपक्ष ने सरकार से लोकपाल विधेयक को वापस लेने को कहा, लेकिन प्रधानमंत्री ने लोकपाल विधेयक वापस लेने से साफ मना कर दिया। अलबत्ता एक प्रस्ताव जरूर पारित किया गया कि जन लोकपाल विधेयक पर भी संसद गंभीरता से विचार करे। पीएम ने जनलोकपाल को एक सुझाव भर करार दिया। इसके पहले वी. नारायणसामी ने संसद की स्थायी समिति के सामने जन लोकपाल विधेयक को भेज गंभीरता दिखाने की कोशिश की थी। देर रात नॉर्थ ब्लाक स्थित वित्त मंत्री के दफ्तर में बातचीत शुरू होने से पहले ही दोनों तरफ तेवर कड़े हो चुके थे। सरकार ने साफ कर दिया कि कनपटी पर बंदूक रखकर कानून नहीं बनवाया जा सकता। मंगलवार को दोनों पक्षों की बैठक में प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने और दूसरे ऐसे मुद्दों जिन पर टीम अन्ना की मांगों पर हामी भर ली गई थी, उन पर भी बुधवार दोपहर को सरकार ने अपना रुख कड़ा कर लिया। देर रात पीएम के आवास पर चली राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति में इन मुद्दों पर सवाल उठाया गया। पी. चिदंबरम और कपिल सिब्बल ने कहा कि सिविल सोसाइटी को कोई भी आश्वासन देने से पहले चर्चा होनी चाहिए थी। माना जा रहा है कि मंगलवार की बैठक के बाद जिस तरह रामलीला मैदान में टीम अन्ना ने सरकार से हुई बातचीत का पूरा ब्यौरा दिया और प्रतिक्रिया दी वह सरकार को नागवार गुजरा। सर्वदलीय बैठक ने भी सरकार को तेवर कड़े करने का मौका दिया। (पेज-2, 3, और 4 भी देखें)
Thursday, August 25, 2011
सरकार-टीम अन्ना में बढ़ी तकरार
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